छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में भूजल स्तर को बचाने और जल संरक्षण को जन आंदोलन का रूप देने के लिए जिला प्रशासन ने एक बार फिर बड़ा कदम उठाया है। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी प्रतिष्ठा ममगाईं ने जिले के सभी किसानों से आगामी ग्रीष्मकालीन सीजन में धान की खेती न करने की अपील की है। प्रशासन का यह अभियान पिछले साल मिली उस ऐतिहासिक सफलता पर आधारित है, जिसने जिले की जल स्थिति में सुधार किया है।
‘वाटर क्रिटिकल’ से ‘सेमी-क्रिटिकल’ श्रेणी में पहुंचा जिला
कलेक्टर ने जानकारी दी कि बेमेतरा जिला पहले गंभीर जल संकट के चलते ‘वाटर क्रिटिकल’ श्रेणी में चिन्हित था। पिछले वर्ष प्रशासन और किसानों ने मिलकर एक अनूठा प्रयोग किया था, जिसके तहत किसानों ने स्वेच्छा से ग्रीष्मकालीन धान (Summer Paddy) की खेती न करने का संकल्प लिया था। इसके स्थान पर उन्होंने चना, गेहूं और सरसों जैसी कम पानी की आवश्यकता वाली फसलों की खेती की थी।
इस सामूहिक जनसहभागिता का शानदार परिणाम यह रहा कि जिले के तीनों विकासखंड—बेमेतरा, बेरला और साजा—’वाटर क्रिटिकल’ श्रेणी से बाहर निकलकर ‘सेमी-क्रिटिकल’ श्रेणी में आ गए हैं। यह जिले के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।
इस वर्ष भी ग्राम सभाओं के जरिए लिया जा रहा संकल्प
पिछले साल की इस सफलता के क्रम को आगे बढ़ाने के लिए इस वर्ष भी जिले की सभी ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन किया जा रहा है। इन बैठकों में किसानों को जल संरक्षण का महत्व समझाया जा रहा है तथा उन्हें ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर वैकल्पिक फसलों को अपनाने के लिए प्रेरित कर संकल्प दिलाया जा रहा है।
कलेक्टर की दो टूक: “धान में लगती है सबसे अधिक पानी की खपत”
कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाईं ने किसानों के नाम अपने संदेश में कहा, “धान की फसल में सबसे ज्यादा पानी की खपत होती है। यदि हम गर्मी के सीजन में भी धान लगाएंगे, तो हमारा भूजल स्तर एक बार फिर तेजी से नीचे चला जाएगा। इसके विपरीत, चना, गेहूं और सरसों जैसी फसलें कम पानी में भी बेहतरीन पैदावार देती हैं और जमीन की उर्वरा शक्ति को भी सुरक्षित रखती हैं।”
प्रशासन का पूरा सहयोग
जिला प्रशासन ने किसानों को आश्वस्त किया है कि जो किसान वैकल्पिक फसलों की ओर रुख करेंगे, उन्हें विभाग की ओर से उच्च गुणवत्ता वाले बीज, कृषि विशेषज्ञों की तकनीकी सलाह और शासन की विभिन्न योजनाओं का पूरा लाभ प्रदान किया जाएगा।
कलेक्टर ने सभी अन्नदाताओं से अपील करते हुए कहा है—
“पानी बचाएं, भविष्य सुरक्षित बनाएं।”
