बेरला (आनंदगांव): सरकारी उदासीनता और विभागीय लापरवाही की जीती-जागती तस्वीर बेरला जनपद के ग्राम पंचायत आनंदगांव में देखने को मिल रही है। यहाँ किसानों की किस्मत बदलने के लिए करोड़ों की लागत से बना बांध आज खुद अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। इस गंभीर मुद्दे को लेकर अब गांव के युवा सरपंच चंदन नायक ने आवाज बुलंद की है। उन्होंने जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग से बांध के जीर्णोद्धार की मांग करते हुए किसानों को उनके हक का पानी दिलाने की गुहार लगाई है।
लाखों की लागत, पर लाभ शून्य
जानकारी के मुताबिक, इस बांध का निर्माण वर्ष 2008 में लगभग 1.5 करोड़ रुपये की लागत से किया गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि आज की स्थिति में इस तरह के विशाल ढांचे के निर्माण में 5 से 10 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। करीब 1.5 किलोमीटर लंबा यह बांध अपनी विशालता के बावजूद किसानों के लिए सफेद हाथी साबित हो रहा है।

पानी रोकने में नाकाम है संरचना
हैरानी की बात यह है कि भारी बारिश के बाद भी बांध में डेढ़ फुट पानी भी जमा नहीं हो पाता। रखरखाव के अभाव और तकनीकी खामियों के कारण पानी का संग्रहण नहीं हो रहा है, जिससे सीमांत और छोटे किसानों के खेत सूखे पड़े हैं। आलम यह है कि:
- रबी की फसल के लिए किसानों के पास सिंचाई का कोई साधन नहीं है।
- बांध का गहरीकरण सालों से नहीं हुआ है।
- बरसाती नालों और जल स्रोतों को बांध से जोड़ने की कोई ठोस योजना नहीं बनाई गई।

