भिलाई (दुर्ग)। छावनी थाना पुलिस ने ऑनलाइन धोखाधड़ी के एक बड़े मामले का खुलासा करते हुए बिहार से एक शातिर आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी ने प्रार्थी का गुम हुआ मोबाइल हाथ लगने के बाद यूपीआई (UPI) के जरिए बैंक खाते से 1,23,900 रुपये पार कर दिए थे। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को धर दबोचा और उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
क्या था पूरा मामला?
घटना की शुरुआत मार्च 2024 में हुई थी, जब प्रार्थी संतोष कुमार का एमआई कंपनी का मोबाइल फोन कहीं गुम हो गया था। इस मोबाइल में जियो और आइडिया के सिम लगे थे। मोबाइल गुम होने के कुछ समय बाद, प्रार्थी के बैंक खाते से फोन-पे (PhonePe) के माध्यम से किश्तों में कुल 1,23,900 रुपये अज्ञात खाते में ट्रांसफर कर दिए गए।
ठगी का अहसास होने पर संतोष कुमार ने छावनी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ अपराध क्रमांक 90/2024 के तहत धारा 420 (धोखाधड़ी) और 34 भादवि के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
बिहार तक पहुंचे जांच के तार
थाना छावनी पुलिस ने विवेचना के दौरान बैंक ट्रांजेक्शन की बारीकी से जांच की। तकनीकी विश्लेषण में पाया गया कि ठगी की रकम बिहार के कैमूर जिले में संचालित एक बैंक खाते में ट्रांसफर हुई है। खाता धारक की पहचान सचिन किसपोट्टा (32 वर्ष) के रूप में हुई।
साक्ष्य पुख्ता होते ही दुर्ग पुलिस की एक टीम को बिहार रवाना किया गया। स्थानीय पुलिस की मदद से आरोपी सचिन को हिरासत में लेकर दुर्ग लाया गया। कड़ी पूछताछ में आरोपी ने जुर्म स्वीकार कर लिया, जिसके बाद उसे विधिवत गिरफ्तार किया गया।
पुलिस की अपील: सावधानी ही बचाव है
इस सफल कार्रवाई के बाद दुर्ग पुलिस ने आम नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है:
- मोबाइल गुमने पर क्या करें: फोन गुम होते ही तुरंत नजदीकी थाने में रिपोर्ट करें और अपने सिम कार्ड को ब्लॉक कराएं।
- UPI/बैंक को सूचना: तत्काल अपने बैंक और यूपीआई सेवा प्रदाता (जैसे Google Pay, PhonePe) को सूचित कर डिजिटल सेवाओं को फ्रीज कराएं।
- संदिग्ध लेन-देन: किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन ट्रांजेक्शन की जानकारी तत्काल पुलिस या साइबर सेल को दें।
कार्यवाही में भूमिका: इस कार्यवाही में छावनी थाना प्रभारी और उनकी टीम की सक्रिय भूमिका रही, जिन्होंने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर अंतरराज्यीय आरोपी को पकड़ने में सफलता हासिल की।

