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प्रशासनिक उदासीनता से आक्रोशित नवकेशा: पंचायत सचिव के ‘कबूलनामे’ के बाद भी कार्रवाई शून्य, सामूहिक इस्तीफे की तैयारी में पंच

बेमेतरा / साजा: जिले के साजा ब्लॉक अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत नवकेशा इन दिनों भ्रष्टाचार और प्रशासनिक उदासीनता के खिलाफ जंग का मैदान बन चुकी है। पंचायत सचिव की कथित कार्यप्रणाली और सरपंच पति के अनैतिक हस्तक्षेप से आक्रोशित निर्वाचित पंचों ने अब शासन-प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सचिव के खिलाफ स्पष्ट सबूत और स्वयं के स्वीकारोक्ति के बावजूद कार्रवाई शून्य होने से नाराज जनप्रतिनिधियों ने अब जिला कलेक्टर को सामूहिक इस्तीफा सौंपने की चेतावनी दी है।

​सचिव का ‘कबूलनामा’ फिर भी विभाग मौन

​प्राप्त जानकारी के अनुसार, पंचायत सचिव चंद्रकांत साहू की कार्यशैली को लेकर पंचों ने पूर्व में उच्चाधिकारियों से लिखित शिकायत की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए जब जांच अधिकारी मौके पर पहुंचे, तो वहां स्थिति और भी चौंकाने वाली निकली। बताया जा रहा है कि जांच के दौरान सचिव ने खुद यह स्वीकार किया कि उनके द्वारा नियमानुसार पंचायत की बैठकें आयोजित नहीं की जातीं और न ही विकास कार्यों या बजट के संबंध में पंचों को विश्वास में लिया जाता है।

​इस ‘ऑन-रिकॉर्ड’ स्वीकारोक्ति के बाद पंचों को उम्मीद थी कि तत्काल निलंबन या स्थानांतरण की कार्रवाई होगी, लेकिन हफ्तों बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। पंचों का आरोप है कि सचिव को ऊपर से संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते प्रशासन दोषियों पर कार्रवाई करने से कतरा रहा है।

सरपंच पति की ‘समानांतर सत्ता’ से विकास अवरुद्ध

​ग्रामीणों और पंचों का सीधा आरोप है कि पंचायत में निर्वाचित सरपंच के बजाय उनके पति मोतीराम रजक ‘समानांतर सरकार’ चला रहे हैं। पंचों ने मीडिया को बताया कि हर छोटे-बड़े शासकीय कार्य में सरपंच पति का सीधा हस्तक्षेप रहता है। स्थिति यह है कि निर्वाचित पंचों की राय लेना तो दूर, उन्हें महत्वपूर्ण फैसलों की सूचना तक नहीं दी जाती। यह न केवल पंचायती राज अधिनियम का उल्लंघन है, बल्कि लोकतंत्र का अपमान भी है।

​गौठान पर अवैध कब्जा और फर्जी बिलों का ‘खेल’

​शिकायतकर्ताओं ने भ्रष्टाचार के गंभीर मुद्दे उठाते हुए बताया कि:

  • अवैध कब्जा: सरकारी गौठान, जो मवेशियों के लिए आरक्षित है, वहां सरपंच पति द्वारा पिछले 3-4 वर्षों से पाइपलाइन का निजी सामान रखकर अवैध कब्जा किया गया है। बार-बार आपत्ति के बावजूद इसे हटाया नहीं गया।
  • फर्जीवाड़ा: जांच के दौरान वित्तीय अनियमितताओं और फर्जी बिलों के मामले भी सामने आए हैं। आरोप है कि सचिव और सरपंच पति की जुगलबंदी ने सरकारी राशि का जमकर दुरुपयोग किया है।
  • पुराना रिकॉर्ड: ग्रामीणों ने मोतीराम रजक के पूर्व कार्यकाल की भी उच्च स्तरीय जांच की मांग की है, जिसमें विकास कार्यों के नाम पर केवल कागजी खानापूर्ति करने के आरोप हैं।

​”आर-पार की लड़ाई”: कलेक्टर कार्यालय कूच की तैयारी

​प्रशासनिक चुप्पी से आहत पंचों ने अब निर्णायक लड़ाई का मन बना लिया है। उन्होंने दो टूक शब्दों में अपनी मांगें रखी हैं:

  1. ​भ्रष्ट और लापरवाह सचिव चंद्रकांत साहू को तत्काल नवकेशा से हटाया जाए।
  2. ​पंचायत कार्यों में सरपंच पति के असंवैधानिक हस्तक्षेप पर कानूनी रोक लगाई जाए।
  3. ​वित्तीय अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कर वसूली की जाए।

पंचों का अल्टीमेटम:

​”यदि जल्द ही हमारी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो हम सभी पंच एक साथ अपना इस्तीफा जिला कलेक्टर को सौंप देंगे। जब निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की बातों की कोई वैल्यू नहीं है और अधिकारी दोषियों को बचा रहे हैं, तो ऐसे पद पर बने रहने का कोई औचित्य नहीं है।”

​अब देखना यह होगा कि बेमेतरा जिला प्रशासन इस सुलझती आग को बुझाने के लिए क्या कदम उठाता है या फिर नवकेशा पंचायत में लोकतंत्र की चाबी ‘सामूहिक इस्तीफे’ की भेंट चढ़ जाती है।

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