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●भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा हसदा नाला स्टॉपडेम रपटा,नियमों को ताक पर रख हुआ निर्माण कार्य, जांच कार्यवाही की मांग●

​बेमेतरा:- तांदुला जलसंसाधन संभाग दुर्ग अंतर्गत बेरला विकासखण्ड के ग्राम उफरा में हसदा नाले पर करीब महीनेंभर पूर्व निर्मित स्टॉपडेम रपटा अपनी उपयोगिता से ज्यादा इन दिनों भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को लेकर चर्चा में है। तकरीबन 424.26 लाख रुपये की भारी-भरकम प्रशासकीय स्वीकृति वाले वर्ष 2025-26 के इस प्रोजेक्ट में निर्माण एजेंसी आरएस तिवारी कंस्ट्रक्शन द्वारा किया गया है। जिसको तांदुला दुर्ग डिवीजन के ईई-एसके पाण्डेय, सब डिवीजन नम्बर-04 के एसडीओ-रोहन शाह, सब इंजीनियर-साक्षी मेश्राम द्वारा निरन्तर मॉनिटरिंग एवं निरीक्षण में निर्माण कराया गया है। जिसके निर्माण में इन दिनों ​गुणवत्ता से भारी समझौता करने का मामला सामने आ रहा है, जिस पर क्षेत्र की आमजनमानस द्वारा उच्च अफसरों से जांच की कड़ी कार्यवाही की मांग की गई है। बताया जा रहा है कि स्टॉपडेम निर्माण स्थल पर न तो कोई सूचना बोर्ड लगा है और न ही कोई चेतावनी बोर्ड, जिससे सूचना के अभाव में कार्य की पारदर्शिता शून्य बनी हुई है। वही निर्माण स्तर की कई मानकों पर खरा नही उतर पा रहा है। जिसमें एक तरफ काम पूरा होने से पहले ही स्टॉपडेम के तटबंधों पर स्पष्ट दरारें नजर आने लगी हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण में बेहद स्तरहीन सामग्री का उपयोग किया गया है और जरूरत के मुताबिक पानी से तराई(क्युरिंग) नहीं की गई, जिससे ढांचा अभी से कमजोर पड़ने लगा है। इसके साथ ही स्टापडेम के कोर और बेस निर्माण में जहाँ मुरम का उपयोग होना था, वहां ठेकेदार ने पैसे बचाने के चक्कर में मिट्टी भर दी है। परिणामस्वरूप निर्माण एजेंसी की ढेरों अनियमितता व मनमानी के कारण निर्माण कार्य की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। इसके अलावा बता दे कि निर्माण के दौरान मौके पर सम्बन्धित अफसरों की निरन्तर निरीक्षण, मॉनिटरिंग एवं मौजूदगी न के बराबर रही, लिहाजा ठेकेदार को मनमानी करने की खुली छूट मिल गई है। जिसमे जिम्मेदार अफसरों की भूमिका सवालों के दायरे में है।

स्टॉपडेम रपटा की उपयोगिता पर सवाल
उल्लेखनीय है कि भिम्भौरी तहसील क्षेत्र के हसदा नाला पर करोड़ों की लागत से बन रहे इस स्टॉपडेम से आसपास के दर्जनों गांवों को कोई विशेष लाभ मिलता नहीं दिख रहा है। एक तरफ निजी फर्म की जमीन है और दूसरी तरफ मुख्य सड़क। गांव से इसकी दूरी इतनी है कि किसानों को इसका सीधा लाभ मिलना मुश्किल है। ऐसा लगता है कि यह प्रोजेक्ट केवल ठेकेदार या अन्य निजी फर्म को लाभ पहुंचाने के लिए तैयार किया गया है। ऐसा स्थानीय ग्रामीणों का मानना है।

निर्माण की जांच कर कार्यवाही की मांग
बहरहाल उफरा स्टॉपडेम निर्माण में ​स्टीमेट के साथ छेड़छाड़ कर शासन के पैसों की बर्बादी और नियमों की अनदेखी पर अब उच्च स्तरीय जांच की मांग ग्रामीणों द्वारा हो रही है। हालांकि इस सम्बंध में तांदुला जलसंसाधन दुर्ग के अफसरों ने कॉल रिसीव नही किया जिससे उनका पक्ष नही मिला। जबकि ठेकेदार आशीष तिवारी का कहना है कि निर्माण कार्य अफसरों की दिशानिर्देश पर किया गया है। विदित हो कि पूर्व में उक्त निर्माण एजेंसी द्वारा ही बेमेतरा विधानसभा के ग्राम सलधा में करीब 08 करोड़ का तटबन्ध कार्य एवं मोहलाई में करीब 04 करोड़ की लागत से तालाब जीर्णोद्धार एवं सीसी नहर लाइनिंग कार्य किया गया है, जिसमे ढेरो अनियमितता पाई गई है, जो विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

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