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{क्षेत्र के आधा दर्जन गाँव बने मुरम खनन के हॉटस्पॉट,रोजाना सैकड़ो ओवरलोड वाहनों की सड़कों पर आवाजाही}

बेमेतरा/भिम्भौरी:- नवगठित भिम्भौरी तहसील क्षेत्र इन दिनों अवैध मुरम खनन का हॉटस्पॉट बनता जा रहा है। प्रदेश की राजधानी रायपुर की सीमा से सटे होने का फायदा उठाकर क्षेत्र के आधा दर्जन खननकर्त्ता न केवल सरकारी खजाने को चूना लगा रहे हैं, बल्कि नियमों को ताक पर रखकर धरती का सीना छलनी कर रहे हैं। आश्चर्य की बात यह है कि रोजाना सैकड़ों गाड़ियां प्रशासन की आंखों के सामने से गुजर रही हैं, लेकिन राजस्व, खनिज और परिवहन विभाग ने रहस्यमयी चुप्पी साध रखी है। जिसमेअवैध खनन का नेटवर्क भिम्भौरी क्षेत्र के तकरीबन दर्जनभर से अधिक गांवों में अबतक फैल चुका है। जिसमे बोरसी, उफरा, खंगारपाठ, बोहारडीह, गोड़गिरी, नेवनारा, हसदा, बेरलाकला, गुधेली, भालेसर, आनन्दगाँव, चण्डीभाठा इत्यादि के साथ बेरला क्षेत्र के ग्राम लेंजवारा, सरदा, टकसींवा, बेरला, सोढ़, नारधी इत्यादि गांव मुरम तस्करों की चपेट में है जहां समय समय पर मुरम व मिट्टी खनन की गतिविधि को अंजाम दिया जाता है। फिलहाल बोरसी, उफरा, खँगारपाठ, बोहारडीह में खुलेआम सुबह से लेकर देर रात तक खनन का यह गैरकानूनी खेल चल रहा है।
गाँव मे तालाब गहरीकरण की आड़ में बड़ा खेल
फिलहाल ग्रामीणों और सूत्रों की मानें तो खननकर्ताओं ने बचने का एक नया तरीका निकाला है। ग्राम पंचायतों में तालाब गहरीकरण के नाम पर कुछ सीमित फीट तक खनन की प्रस्ताव और अनुमति ली जाती है, लेकिन इसकी आड़ में खेतों और सरकारी जमीन से व्यवसायिक स्तर पर मुरम निकाला जा रहा है। 20 से 25 फीट गहरे जानलेवा गड्ढे खोदकर उन्हें खुला छोड़ दिया गया है, जो आने वाले समय में किसी बड़ी दुर्घटना को न्योता दे रहे हैं।
विभागीय सांठगांठ से रेड के पहले ही मिल जाती है खबर
दरअसल आश्चर्य की बात यह है कि खनन माफियाओं का सूचना तंत्र सरकारी तंत्र से भी ज्यादा मजबूत है। एक खननकर्ता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि प्रशासनिक विभागों के साथ ऐसी सेटिंग है, कि कार्रवाही के लिए टीम के निकलने से पहले ही हमें मुखबिरों के जरिए सूचना मिल जाती है। टीम के पहुंचने से पहले ही मशीनें और गाड़ियां मौके से हटा ली जाती हैं, जिससे वे कार्यवाही से बच जाते है, जिसमे प्रशासन की बड़ी भूमिका रहती है।
विकास की सड़कों का हो रहा विनाश
चूंकि क्षेत्र में मुरम व मिट्टी खनन पश्चात लगातार ओवरलोड वाहनों की अंधाधुंध आवाजाही ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत बनी सड़कों की कमर तोड़ दी है। सीमित क्षमता वाली ये सड़कें भारी ट्रकों के दबाव से धंस रही हैं। क्षेत्र का प्राकृतिक वातावरण धूल और धुएं की चपेट में है, जिससे स्थानीय निवासियों का जीना दूभर हो गया है। दूसरी ओर क्षेत्र के प्राकृतिक संपदा को लगातार लुटे जाने से रॉयल्टी चोरी के कारण शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व की हानि हो रही है। वही इस गतिविधि से आरटीओ, माइनिंग एक्ट और राजस्व नियमों की सरेआम अवहेलना कर शासन-प्रशासन के दिशानिर्देश की खूब धज्जियां उड़ाई जा रही है। आखिर इस गम्भीर मुद्दे पर जिला प्रशासन संज्ञान न ले पाने की वजह से खननकर्ताओं के हौसले बुलन्द है। लिहाजा भिम्भौरी क्षेत्र में प्रशासनिक पकड़ ढीली होने के कारण कानून का कोई खौफ नहीं है। यदि समय रहते जिला प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार नहीं किया, तो क्षेत्र की सड़कें और पर्यावरण पूरी तरह तबाह हो जाएंगे, जो शासन-प्रशासन के लिए सवालिया प्रश्नचिन्ह है।
इस सम्बंध में बेरला एसडीएम दीप्ती वर्मा से बात की गई तो उन्होंने माइनिंग विभाग का हवाला दिया। ततपश्चात ज़िला खनिज अधिकारी रोहित साहू से संपर्क की गई तो उन्होंने कॉल रिसीव नही किया।
