
■बेमेतरा:- बरसात की पहली फुहारों के बीच ही बेरला जनपद पंचायत के ग्राम कठिया पंचायत के विकास दावों की धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं। दरअसल गाँव-गाँव मे स्वच्छ भारत और आदर्श ग्राम का कागजो में शोबाजी ढिंढोरा पीटने वाले शासन-प्रशासन की पोल इन दिनों कठिया गांव की इन बदहाल गलियों ने खोल दी है। आलम यह है कि गांव में अनेक इलाको में जरूरी निकासी व्यवस्था न होने के कारण गाँव के गंदे पानी का जमावड़ा सड़क पर हो चुका है। जिसमे गाँव के अंदरूनी गलियां फिलहाल किसी गंदे नाले में तब्दील हो चुकी हैं, जहां पर पूरी सड़क पर घुटनों तक बदबूदार पानी और कीचड़ का नज़ारा देखने को मिल रहा है, लिहाजा गाँव मे स्थानीय ग्रामीणों का पैदल चलना तो दूर, घरों से निकलना भी दूभर हो गया है। वही इस मामले पर जिम्मेदार स्थानीय ग्राम पंचायत से लेकर जनपद, ज़िला पंचायत तक में बैठकर जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों को इसकी कोई सुध नही है। लगातार गाँव क्षेत्र में विकास के खाके तैयार कर कागजी औपचारिकता पूर्ण कर लेते है। जबकि धरातल पर इन दिनों कठिया के ग्रामीण बड़ा ही कष्टदायक जीवन यापन झेलने के लिए अभिशप्त हैं।

यहां तक शासन-प्रशासन की घोर लापरवाही और पंचायत की निष्क्रियता का खामियाजा यहां के मासूम बच्चों और बुजुर्गों को भुगतना पड़ रहा है। चूंकि कीचड़ और गंदे पानी के इस जलजमाव के कारण पूरी बस्ती में संक्रामक बीमारियों और महामारी फैलने का खतरा मंडरा रहा है। नालियों की सफाई न होने से गलियों में बजबजाता पानी अब लोगों के घरों के दरवाजों तक दस्तक दे रहा है।गांव के बुजुर्ग और स्कूली बच्चे हर दिन इस दलदल में जाने से कतराते है फिर भी आवागमन को मजबूर है। लेकिन कुंभकर्णी नींद में सोए प्रशासन के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है। यह स्थिति साफ दर्शाती है कि आम जनता की बुनियादी समस्याओं से सिस्टम को कोई सरोकार नहीं रह गया है। इस सम्बंध में कठिया ग्राम पंचायत के सरपंच बसन्त कुमार भारद्वाज से सम्पर्क किया गया तो उन्होंने फोन नह उठाया जिससे उनका पक्ष नही मिल पाया।
