
दुर्ग/धमधा:- लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) दुर्ग संभाग के अंतर्गत धमधा विकासखण्ड कर देवरी एवं खिलोराकला में बनने वाले उच्च माध्यमिक विद्यालय भवन का निर्माण कार्य शुरू होने से पहले ही विवादों और संदेह के घेरे में आ गया है। जिसमे इन दिनों विभाग ने कार्यस्थल पर औपचारिकता पूरी करने के लिए एक सूचना बोर्ड तो टांग दिया है, लेकिन चालाकी ऐसी कि आम जनता यह जान ही न पाए कि काम कब शुरू हुआ और कब खत्म होना है।
जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत या ठेकेदार को खुली छूट?
दरअसल दोनों निर्माण स्थल पर लगे सूचना पटल के बोर्ड से साफ उजागर होता है कि प्रति निर्माण कार्य करीब 115.85 लाख (लगभग 1.15 करोड़) रुपये की भारी-भरकम लागत से बनने वाले इस स्कूल भवन के लिए 06 महीने की अवधि तय की गई है। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि पीडब्ल्यूडी के जिम्मेदार अधिकारियों में कार्यपालन अभियंता ए.के. भट्टाचार्य, अनुविभागीय अधिकारी अभिषेक मेश्राम और उप अभियंता अजीता साजन की नाक के नीचे ठेकेदार अर्श ट्रेडर्स प्राइवेट लिमिटेड ने बोर्ड से कार्य प्रारंभ और समाप्ति की तारीख ही गायब कर दी है।
स्थानीय जनता की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश
फिलहाल स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि जानबूझकर तारीखों को छुपाया गया है ताकि निर्माण कार्य में महीनों की देरी होने पर भी ठेकेदार पर कोई उंगली न उठा सके और अधिकारी भी कागजी लीपापोती कर सकें। करोड़ों रुपये के इस प्रोजेक्ट वाली जगह पर वर्तमान में विकास के नाम पर सिर्फ सूनी और उजड़ी हुई जमीन नजर आ रही है।
सुरक्षा ताक पर, कब बदलेगी सूरत?
चूँकि शिक्षा के इस मंदिर के निर्माण में शुरुआती स्तर पर ही बरती जा रही यह अपारदर्शिता कई गंभीर सवाल खड़े करती है। क्या सवा करोड़ का यह बजट सिर्फ फाइलों और बोर्ड लगाने में ही खपाया जा रहा है? देखना होगा कि मामले के उजागर होने के बाद पीडब्ल्यूडी के आला अधिकारी इस गंभीर लापरवाही पर ठेकेदार के खिलाफ क्या एक्शन लेते हैं, या फिर हमेशा की तरह मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।
इस सम्बंध में पीडब्ल्यूडी उपसम्भाग क्रमांक 02(धमधा क्षेत्र) के एसडीओ अभिषेक मेश्राम से संर्पक किया गया तो उन्होंने कॉल नही उठाया,जिससे खबर में उनका प्रशासनिक पक्ष नही मिल पाया।
