दुर्ग / भिलाई:
दुर्ग जिले के भिलाई नगर थाना क्षेत्र अंतर्गत सेक्टर-07 मार्केट स्थित एक शासकीय उचित मूल्य (राशन) दुकान में भारी मात्रा में खाद्यान्न की गड़बड़ी का मामला सामने आया है। दुकान के भौतिक सत्यापन के दौरान 1007.51 क्विंटल चावल कम मिलने पर खाद्य विभाग की शिकायत के आधार पर पुलिस ने आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत अपराध दर्ज कर दुकान के संचालक व अध्यक्ष को गिरफ्तार कर लिया है।
क्या है पूरा मामला?
कलेक्टर (खाद्य शाखा) जिला दुर्ग के आदेश पर खाद्य निरीक्षक द्वारा थाना भिलाई नगर में लिखित आवेदन दिया गया था। इसके आधार पर सेक्टर-07 मार्केट, भिलाई स्थित उचित मूल्य दुकान (दुकान आईडी-431004118) के अध्यक्ष धनंजय सिंह राजपूत और विक्रेता नमिता सिन्हा के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।
जांच समिति द्वारा पूर्व में दुकान का औचक निरीक्षण कर ऑनलाइन स्टॉक और भौतिक सत्यापन किया गया था, जिसमें गंभीर अनियमितताएं पाई गईं।
जांच में हुआ बड़ा खुलासा
निरीक्षण के दौरान दुकान में स्टॉक पंजी उपलब्ध नहीं मिली, जिसे अध्यक्ष ने विक्रेता के पास होने की बात कही। जब ऑनलाइन रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक का मिलान किया गया, तो नियमों को ताक पर रखकर भारी हेरफेर का पता चला:
- ऑनलाइन रिकॉर्ड के अनुसार: दुकान में 1034.01 क्विंटल चावल होना चाहिए था।
- मौके पर भौतिक सत्यापन में: केवल 26.50 क्विंटल चावल ही पाया गया।
- कुल कमी: 1007.51 क्विंटल अरवा चावल गायब मिला।
अध्यक्ष से इस भारी अंतर को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया, लेकिन वे कोई भी संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।
आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई
जांच में संचालकों द्वारा छत्तीसगढ़ सार्वजनिक वितरण प्रणाली (नियंत्रण) आदेश, 2016 के विभिन्न प्रावधानों और अनुबंध की शर्तों का खुला उल्लंघन पाया गया। यह कृत्य आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3/7 के तहत दंडनीय है।
थाना भिलाई नगर पुलिस ने अपराध क्रमांक 401/2026 दर्ज कर विवेचना शुरू की और साक्ष्यों के आधार पर मुख्य आरोपी एवं दुकान के अध्यक्ष धनंजय सिंह राजपूत (63 वर्ष), निवासी सेक्टर-07, भिलाई को गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय के समक्ष पेश कर दिया है, जहाँ से उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।
पुलिस की आम नागरिकों से अपील
दुर्ग पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली के खाद्यान्न की कालाबाजारी या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि यदि उन्हें राशन वितरण में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की जानकारी मिलती है, तो इसकी सूचना तुरंत पुलिस या खाद्य विभाग को दें ताकि दोषियों पर सख्त कानूनी शिकंजा कसा जा सके।
