■बेमेतरा:- जिले के कोदवा-देवरबीजा क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग और ड्रग डिपार्टमेंट की लचर कार्यशैली के चलते नॉट फॉर सेल लिखी सैंपल दवाइयों का अवैध कारोबार धड़ल्ले से फल-फूल रहा है।फिलहाल क्षेत्र के कई मेडिकल स्टोर और अंचल में सक्रिय झोलाछाप डॉक्टरों के क्लीनिकों में इन प्रतिबंधित दवाइयों को धड़ल्ले से खपाया जा रहा है। हालात यह हैं कि कंपनियों द्वारा डॉक्टरों को मुफ्त में दिए जाने वाले इन सैंपल्स को मेडिकल स्टोर्स पर मूल एमआरपी दरों पर सीधे ग्रामीण मरीजों को बेचा जा रहा है, जिससे गरीब और भोले-भाले मरीजों की जेब पर डाका डालने के साथ-साथ उनकी जान के साथ भी सीधा खिलवाड़ हो रहा है।
विदित हो, कि इस गंभीर और संगठित खेल के बावजूद स्थानीय ड्रग डिपार्टमेंट और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पूरी तरह संदेहास्पद बनी हुई है। क्षेत्र में लंबे समय से प्रतिबंधित सैंपल दवाइयों की इस अवैध बिक्री का काला कारोबार जारी है, लेकिन इसके बाद भी खाद्य एवं औषधि प्रशासन की फ्लाइंग स्क्वाड या जांच टीमें कार्रवाई करने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही हैं। स्थानीय लोगों और जानकारों का आरोप है कि बिना विभागीय मिलीभगत के इस तरह खुलेआम अवैध दवाइयों का बाजार चलना असंभव है, जिससे सीधे तौर पर ड्रग इंस्पेक्टर और दवा विभाग के आला अधिकारियों की कार्यप्रणाली गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है।
फिलहाल इस समूचे मामले में जब मीडिया द्वारा जिम्मेदार महकमे का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो विभाग की पोल खुलने के डर से उच्च अधिकारियों ने चुप्पी साध ली। इस संबंध में जब सहायक दवा नियंत्रक राजेश क्षत्रिय से संपर्क किया गया, तो उन्होंने इस गंभीर मुद्दे पर कोई भी जवाब देना मुनासिब नहीं समझा। बहरहाल, जिम्मेदार अधिकारियों का जवाब नही देना कही न कही इस अवैध सिंडिकेट को परोक्ष रूप से संरक्षण मिल रहा है। क्षेत्रवासियों और जागरूक नागरिकों ने अब इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कर ड्रग विभाग के लापरवाह अधिकारियों और मेडिकल संचालकों पर कठोर कार्रवाई की मांग उठाई है।
