
■देवकर:- पवित्र सावन मास के अंतिम सोमवार पर नगर देवकर और ग्रामम सहसपुर क्षेत्र में भक्ति और उत्साह का ऐसा अभूतपूर्व संगम नज़ारा देखने को मिला, जिसमे नगर अंचल के पूरा इलाका ‘बम-बम भोले’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से गूंज उठा। चूँकि नगर देवकर से 05 किलोमीटर दूर ग्राम सहसपुर के प्राचीन शिव मंदिर से आरंभ हुई इस भव्य कांवड़ यात्रा में जनसैलाब उमड़ पड़ा, जहां बच्चों से लेकर बुजुर्गों और महिलाओं तक ने पूरे जोश के साथ सहभागिता निभाई। जिसमे डीजे की धुन, पारंपरिक बाजे-गाजे और शिव भजनों के बीच जब यह यात्रा आगे बढ़ी, तो संपूर्ण वातावरण पूरी तरह से शिवमय हो गया।
चूंकि इस परंपरा और आधुनिकता का संगम बनी इस चार किलोमीटर लंबी पदयात्रा ने क्षेत्र में अद्वितीय ऊर्जा का संचार किया। सहसपुर से चलकर यह भव्य कांवड़ यात्रा देवकर नगर के विख्यात श्रीराम मंदिर पहुँची, जहाँ से श्रद्धालुओं ने निकट पवित्र सुरही नदी की ओर रुख किया। जिसमे स्थानीय जनप्रतिनिधियों, युवाओं और गणमान्य नागरिकों की सक्रिय भागीदारी ने इस आयोजन को एक ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया, जहाँ हर कोई भगवा रंग के ध्वज व वेशभूषा में रंगा नजर आया।

फिलहाल इस दौरान सुरही नदी के तट पर पहुंचे श्रद्धालुओं ने पूरी श्रद्धा के साथ पवित्र जल कलशों में एकत्र किया। इसके बाद विधि-विधान और मंत्रोच्चार के बीच सभी भक्तगण उसी उत्साह के साथ पुनः शिव मंदिर की ओर पैदल रवाना हुए। जिसमे बाद विशेष पूजा आराधना के बाद सभी कावडियों व श्रद्धालुओं द्वारा जलाभिषेक किया गया। वही मार्ग में जगह-जगह भक्तों का स्वागत किया गया, जिससे ग्रामीण अंचल में आपसी सौहार्द, संस्कृति और सनातन आस्था की एक बेहद सुंदर और जीवंत तस्वीर देखने को मिली।
बहरहाल सहसपुर गाँव स्थित प्राचीन शिव मंदिरों में इस पवित्र जल से महादेव के शिवलिंग का जलाभिषेक किया गया। क्षेत्र के मुख्य पुजारियों और वरिष्ठ ग्रामीणों के अनुसार, सहसपुर स्थित इस प्राचीन शिव मंदिर पर सावन के अंतिम सोमवार को जलाभिषेक करने का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। ऐसी अटूट और प्राचीन मान्यता है कि इस विशेष दिवस पर सच्चे हृदय से जो भी भक्त आराधना करता है, भोलेनाथ उसकी समस्त मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
विदित हो कि पांचवां वर्ष में प्रवेश कर चुकी यह पारंपरिक कांवड़ यात्रा अब क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और सनातन धरोहर का एक मजबूत स्तंभ बन चुकी है। सावन के समापन पर हर साल निकलने वाला यह अनुष्ठान न केवल नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ रहा है, बल्कि क्षेत्र में सामाजिक एकजुटता की मिसाल भी पेश कर रहा है।
