
■बेमेतरा:- जिले में इन दिनों मानसून की दस्तक के साथ ही राष्ट्रीय राजमार्ग, स्टेट हाईवे, मुख्य मार्गों से लेकर ग्रामीण मुख्य मार्गों तक मवेशियों का भारी जमावड़ा देखने को मिल रहा है।चूंकि इन दिनों बरसात का सीजन होने से बारिश से बचने और सुरक्षित ठिकाने की तलाश में झुंड के झुंड गाय व अन्य पशु सीधे डामर वाली सड़कों के बीचों-बीच डेरा जमा लेते हैं। आलम यह है कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर सिमगा से कवर्धा मार्ग के बीच बेमेतरा ज़िला क्षेत्र में लगभग 10 से 12 ऐसे संवेदनशील स्थल चिह्नित हो चुके हैं, जहां मवेशियों के कारण आए दिन गंभीर सड़क हादसे हो रहे हैं और लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ रही है।
इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए शासन और स्थानीय प्रशासन द्वारा ग्राम स्तर से लेकर जिला स्तर तक कई तरह के बड़े दावे और प्रयास किए जाने की बात कही जाती है, लेकिन धरातल पर इनका असर शून्य नजर आ रहा है। मवेशी मालिकों द्वारा छोड़े गए बेसहारा पशुओं को गोठानों या सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की व्यवस्था केवल कागजी फाइलों तक ही सीमित होकर रह गई है। नतीजतन, शाम ढलते ही और कोहरे या बारिश के समय सड़कों पर बैठे इन मवेशियों का अंदाजा वाहन चालकों को नहीं मिल पाता, जिससे तेज रफ्तार वाहन सीधे इनसे टकराकर दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं।
चूंकि स्थानीय रहवासियों और वाहन चालकों में इस व्यवस्था को लेकर भारी आक्रोश व्याप्त है, क्योंकि प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस और स्थाई कार्रवाई नहीं की गई है। लोगों ने मांग की है कि हाईवे और मुख्य मार्गों पर बैठने वाले मवेशियों को तुरंत हटाया जाए और सड़कों पर पशुओं को छोड़ने वाले लापरवाह पशुपालकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो। यदि समय रहते इस दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में बेमेतरा की सड़कों पर हादसों का यह सिलसिला और भी अधिक भयावह रूप ले सकता है।
