■बेमेतरा:- साजा विकासखंड के बोरतरा में खुले नवीन महाविद्यालय को तीन शैक्षणिक सत्र बीत चुके हैं, लेकिन आज तक इस कॉलेज को न तो खुद का भवन मिल पाया है और न ही पर्याप्त शैक्षणिक सेटअप। वर्तमान में यह कॉलेज गाँव की ही शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला के महज तीन कमरों में संचालित हो रहा है, जहाँ छात्र-छात्राओं के बैठने के लिए सिर्फ तीन और स्टाफ के लिए केवल दो कमरे ही आवंटित किए गए हैं। चूंकि सुविधाओं के इस भारी अभाव और गिनती के शिक्षकों के भरोसे पढ़ाई करने की मजबूरी के कारण आसपास के दो-तीन दर्जन गांवों के युवा उच्च शिक्षा से वंचित हो रहे हैं या फिर मजबूरन अन्य दूरदराज के शहरों में पलायन कर रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि इसी क्षेत्र के साथ स्वीकृत हुए अन्य नवीन महाविद्यालयों—जैसे ठेलका, भिम्भौरी, दाढ़ी, नांदघाट, पेंड्रावन और देवरबीजा—के लिए शासन स्तर से पक्के भवनों की स्वीकृति मिल चुकी है और निर्माण कार्य भी आगे बढ़ चुके हैं, जबकि बोरतरा महाविद्यालय की उपेक्षा अब तक जारी है। शासन-प्रशासन की इस उदासीनता के चलते स्थानीय स्तर पर उच्च शिक्षा का सपना देख रहे ग्रामीण अंचल के विद्यार्थियों में भारी निराशा और आक्रोश व्याप्त है, क्योंकि बुनियादी संसाधनों और जरूरी साधनों की कमी उनकी राह में सबसे बड़ा रोड़ा बन गई है।
फिलहाल स्थानीय क्षेत्रवासियों और छात्र-छात्राओं ने शासन और प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि इस गंभीर समस्या पर तत्काल संज्ञान लेते हुए बोरतरा महाविद्यालय के लिए नवीन और सुविधाजनक भवन की जल्द से जल्द स्वीकृति दी जाए। इसके साथ ही कॉलेज में पर्याप्त शैक्षणिक व गैर-शैक्षणिक स्टॉफ की नियुक्ति की जाए, ताकि ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने में किसी प्रकार की असुविधा न हो और उनकी पढ़ाई की व्यवस्था सुगम व सरल बन सके।
