
■बेमेतरा/बोरतरा:- जलसंसाधन संभाग बेमेतरा अंतर्गत साजा विकासखण्ड के ग्राम पंचायत बोरतरा के चिलहीखार क्षेत्र में पिछले एक सप्ताह से बड़ी नहर की पटरी टूटने के कारण स्थानीय किसानों की मुसीबतें लगातार बढ़ती जा रही हैं। खेतों में नहर का पानी अनवरत बहने से किसानों में भारी चिंता और आक्रोश देखा जा रहा है। किसानों का कहना है कि उनकी धान की फसल पूरी तरह पककर तैयार खड़ी है, लेकिन नहर से हो रहे जलभराव ने उनकी महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया है।
सीजन से पहले धान के हारुणा किश्म के पौधे को खासा नुकसान
दरअसल इन दिनों खेतों में लगातार जलभराव होने से जलमग्न हुई अर्ली धान की फसल के खराब होने, सड़ने और जमीन पर गिरने का गंभीर अंदेशा बन गया है। फसल कटाई के मुहाने पर खड़ी है, लेकिन खेतों में घुसे घुटने भर पानी और कीचड़ के कारण किसान मशीनों या मजदूरों के जरिए कटाई नहीं कर पा रहे हैं। यदि पानी की निकासी जल्द नहीं हुई, तो पूरी फसल बर्बाद हो जाएगी और किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
जिम्मेदार अफसरों की उदासीनता से क्षेत्र के आक्रोशित किसान
चूँकि स्थानीय ग्रामीणों और पीड़ित किसानों का आरोप है, कि उन्होंने इस गंभीर स्थिति को लेकर सिंचाई एवं नहर विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को कई बार लिखित एवं मौखिक रूप से सूचित किया है। इसके बावजूद विभाग की ओर से अब तक स्थल निरीक्षण या मरम्मत कार्य शुरू करने की कोई सुध नहीं ली गई है। प्रशासनिक अमले और नहर विभाग की इस घोर उपेक्षा व उदासीनता से क्षेत्र के किसानों में गहरा असंतोष व्यापत है।
तत्काल मरम्मत और पानी रोकने की जिला प्रशासन से गुहार
फिलहाल किसानों ने जिला प्रशासन तथा संबंधित सिंचाई विभाग के उच्च अधिकारियों से मामले का संज्ञान लेते हुए तत्काल प्रभाव से नहर की टूटी पटरी की मरम्मत कराने की मांग की है। साथ ही खेतों में भर रहे पानी के बहाव को अविलंब रोककर जल निकासी की समुचित व्यवस्था बनाने का आग्रह किया है, ताकि किसानों की मेहनत की गाढ़ी कमाई और फसल को बर्बादी से बचाया जा सके।

