
रिपोर्ट-✍🏻मुदस्सर मोहम्मद
राजनांदगांव/डोंगरगढ़:- जिले के डोंगरगढ़ शहर अंतर्गत बोरतालाव रोड पर स्थित उप जेल इन दिनों प्रशासनिक उदासीनता और भारी लापरवाही का एक जीवंत उदाहरण बन गया है। केंद्रीय जेल दुर्ग से संबद्ध इस दूसरे सबसे महत्वपूर्ण कारागार की सुध लेने वाला कोई नहीं है, जिसके चलते यह परिसर मरम्मत और रखरखाव के अभाव में पूरी तरह जर्जर हो चुका है। आलम यह है कि बरसों से इस भवन की रंगाई-पोताई तक नहीं कराई गई है, जिससे इसकी दीवारें अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही हैं।फिलहाल कागजों में हर साल मूलभूत कार्यों और रख-रखाव के नाम पर लाखों रुपये का भारी-भरकम बजट शासन द्वारा जारी किया जाता है, लेकिन धरातल पर उन पैसों का क्या हो रहा है, यह बड़ा सवाल है। इस लचर व्यवस्था ने शहर के भीतर प्रशासनिक सक्रियता और दावों की पोल खोलकर रख दी है, जहां जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदकर बैठे हुए हैं।
एक तरफ जहां इस उप जेल में कैदियों की संख्या काफी कम बताई जा रही है, वहीं दूसरी तरफ इन्ही गंभीर अव्यवस्थाओं और बुनियादी असुविधाओं के बीच यहां पदस्थ कर्मचारियों को अपनी जान जोखिम में डालकर ड्यूटी करनी पड़ रही है, जो कि अत्यंत चिंताजनक है। आए दिन किसी अनहोनी के खतरे के साये में काम करने को विवश इन कर्मचारियों की सुधि लेने वाला कोई जिम्मेदार विभाग सामने नहीं आ रहा है। जब इस संवेदनशील और भ्रष्टाचार की बू देती पूरी स्थिति पर जेल अधीक्षक से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो उनसे संपर्क तक नहीं हो पाया, जिससे उनकी कार्यशैली पर और अधिक गंभीर सवालिया निशान खड़े होते हैं। साफ है कि लाखों के बजट की बंदरबांट और प्रशासनिक सुस्ती के चलते डोंगरगढ़ का यह उप जेल कभी भी किसी बड़े हादसे को न्यौता दे सकता है।
