
बेमेतरा/बेरला:-जनपद पंचायत बेरला के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत रेवे से स्वच्छता व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाने वाली तस्वीर सामने आई है। यहाँ आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक 2 के ठीक समीप स्थित नाडेप टैंक सालों से कचरे से पटा पड़ा है। रखरखाव और सफाई के अभाव में नाडेप पूरी तरह भर चुका है और अब कचरा बाहर हवा तथा आवारा मवेशियों के कारण चारों तरफ बिखर रहा है। संवेदनशील स्थान पर लगा गंदगी का यह अंबार शासन-प्रशासन के स्वच्छता अभियानों की जमीनी हकीकत को उजागर कर रहा है।

मासूम बच्चों के स्वास्थ्य पर मंडराता बड़ा खतरा
आंगनबाड़ी केंद्र में प्रतिदिन छोटे-छोटे मासूम बच्चे शिक्षा और पोषण आहार प्राप्त करने आते हैं। परिसर के पास ही कचरा डंप होने से बदबू और मक्खी-मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ गया है। खेल-खेल में कई बार मासूम बच्चे इस कचरे की ओर चले जाते हैं और गंदगी व फेंकी गई वस्तुओं को उठाकर खेलने लगते हैं। इससे बच्चों में संक्रामक बीमारियां फैलने का गंभीर खतरा बना हुआ है।
अभियानों और बजट पर उठे सवाल
हाल ही में प्रधानमंत्री के जन्मदिन व 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर चलाए गए ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत गांव के चौक-चौराहों पर सफाई का दावा किया गया था, लेकिन आंगनबाड़ी के पास की यह बदहाली दावों के विपरीत कहानी बयां कर रही है।
पंचायती राज व्यवस्था, मूलभूत सुविधा एवं 15वें वित्त आयोग से गांव के विकास और स्वच्छता के लिए मिलने वाली लाखों रुपये की राशि के उपयोग पर भी अब ग्रामीणों ने सवाल खड़े कर दिए हैं। इतने बड़े बजट के बावजूद आंगनबाड़ी जैसी जगह से कचरा न हटाया जाना प्रबंधन की घोर अनदेखी को दर्शाता है।
जनप्रतिनिधियों की कार्यप्रणाली कटघरे में
स्थानीय स्तर पर ज़िम्मेदारी संभालने वाले सरपंच संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं जनपद पंचायत बेरला के सरपंच संघ अध्यक्ष की कार्यप्रणाली पर भी उंगली उठ रही है। कचरे के स्थायी निपटारे के लिए ठोस कदम न उठाए जाने से ग्रामीणों में गहरा आक्रोश व्याप्त है।
“दिखावे तक सीमित रह गई हैं योजनाएं”
जनसेवक रविन्द्र भास्कर चौबे ने अपना विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि क्षेत्र में शासन-प्रशासन की महत्वाकांक्षी योजनाएं केवल शोबाजी और दिखावे तक सीमित रह गई हैं। गांव के आंगनबाड़ी केंद्र के पास जमा यह कचरा प्रशासनिक दावों और जमीनी धरातल के बड़े अंतर को साफ बयां कर रहा है।
