
(●शिवनाथ के जलस्तर घटने के बाद सामने आई तबाही की तस्वीर; प्रशासन ने शुरू किया सर्वेक्षण, एसडीएम का संपर्क नहीं●)
बेमेतरा/बेरला:- विगत दिनों शिवनाथ नदी में आई भीषण बाढ़ का व्यापक असर अब जिले के बेरला विकासखंड एवं तहसील क्षेत्र में साफ तौर पर दिखने लगा है।जिसमे शिवनाथ सहित अन्य सहायक नदी का जलस्तर घटने और स्थिति सामान्य होने के बाद बाढ़ से हुए नुकसान की भयावह तस्वीर खुलकर सामने आई है। देखा जाए तो बेरला अंचल की जीवनरेखा मानी जाने वाली शिवनाथ और उसकी सहायक नदियों-नालों के तटीय इलाकों में बसे गांवों के खेत-खलिहान पूरी तरह प्रभावित हुए हैं। चूंकि फसलें जलमग्न हो जाने से कृषि व्यवस्था को गहरा झटका लगा है। चूंकि वर्तमान में धान का मुख्य सीजन होने के कारण खेतों में कई दिनों तक जरूरत से ज्यादा पानी जमा रहा। जिसमे पानी की इस अति की वजह से धान के पौधे पीले पड़कर गलने लगे हैं। नतीजतन, कई ग्रामीण इलाकों में सैकड़ों एकड़ रकबे में फैली फसल बाढ़ के पानी में डूबकर पूरी तरह से नष्ट हो चुकी है। इस प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया है, जिससे उनके सामने भारी आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

दरअसल बेरला विकासखण्ड क्षेत्र के शिवनाथ तटवर्ती गांवों में तबाही का असर व्यापक पैमाने पर देखा जा रहा है। ताज़ा जानकारी के अनुसार, बेरला तहसील के ग्राम कुम्हिगुड़ा, डंगनिया, खम्हरिया-एम, रेवे, मंगलौर, भरचट्टी, सिंवार, भाठासोरही, सलधा, टकसींवा, अतरगढ़ी, बूढ़ाजौंग, रांका, बहेरघट, सण्डी, मनियारी, चेतवा और किरितपुर सहित करीब दो से तीन दर्जन गांव बाढ़ से सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। इन इलाकों में भारी नुकसान की खबर है।
इस गंभीर स्थिति पर बेरला तहसीलदार उईस्यानी मानकर ने बताया कि शासन-प्रशासन के दिशानिर्देशों के तहत बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फसलों के नुकसान का सर्वे कार्य शुरू कर दिया गया है। सर्वेक्षण की अंतिम रिपोर्ट तैयार होने के बाद ही नुकसान का सटीक आकलन कर क्षतिपूर्ति व मुआवजे का निर्णय लिया जाएगा। वहीं दूसरी ओर, प्रभावित किसानों ने शीघ्र मुआवजा देने की गुहार लगाई है ताकि वे इस नुकसान की भरपाई कर सकें। हालांकि, इस पूरे मामले पर बेरला एसडीएम दीप्ति वर्मा से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनका कॉल रिसीव नहीं हो सका।

