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​आजादी के दशकों बाद भी अंधेरे में निजामडीह:

खैरागढ़/साल्हेवारा: छत्तीसगढ़ के वनांचल क्षेत्रों में विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच एक कड़वी हकीकत सामने आई है। खैरागढ़ विकासखंड के साल्हेवारा (बंकरकट्टा क्षेत्र) के अंतर्गत आने वाले ग्राम निजामडीह में आज भी लोग आदिम युग की तरह जीवन जीने को मजबूर हैं। विडंबना यह है कि इस गांव तक आज तक बिजली की एक किरण भी नहीं पहुंची है।

बिजली और पानी के लिए तरस रहे ग्रामीण

​निजामडीह गांव की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। यहाँ न तो घर रोशन हैं और न ही पीने के साफ पानी की उचित व्यवस्था है। ग्रामीणों का कहना है कि बिजली न होने के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और जंगली जानवरों का खतरा हमेशा बना रहता है। पानी के लिए भी महिलाओं को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है या दूषित जल पर निर्भर रहना पड़ता है।

सांसद का दौरा, पर हाथ लगी सिर्फ निराशा

​हाल ही में राजनांदगांव सांसद संतोष पांडेय ने क्षेत्र का दौरा किया। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि इस बार उनकी अंधेरी जिंदगी में उजाला होगा, लेकिन आरोप है कि सांसद ने केवल समस्याओं को सुना और हमेशा की तरह ‘आश्वासन’ देकर चले गए। ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर निजामडीह आज भी उपेक्षित है।

ग्रामीणों की चेतावनी

​गांव वालों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। ग्रामीणों का कहना है कि:

​”हमें सिर्फ आश्वासन नहीं, बिजली का खंभा और नल चाहिए। अगर जल्द ही हमारी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो हम उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।”

​अब देखना यह होगा कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस वनांचल गांव की सुध लेते हैं या निजामडीह के लोग ऐसे ही अंधेरे में जीने को मजबूर रहेंगे।

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