■बेमेतरा:- ज़िला प्रशासन द्वारा फसल अवशेष (पराली) जलाने पर लगाए गए प्रतिबंध और सड़क पर सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे धरातल पर दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। ताजा मामला दुर्ग-बेमेतरा स्टेट हाईवे का है, जहां ग्राम केशडबरी और कोदवा के बीच किसानों द्वारा जलाई गई पराली की आग ने सड़क किनारे स्थित पीडब्ल्यूडी विभाग के एक विशाल सूखे पेड़ को अपनी चपेट में ले लिया। देखते ही देखते सड़क किनारे खड़ा यह पेड़ जलकर पूरी तरह खाक हो गया।
दरअसल इन दिनों फसल कटाई के बाद खेतों में पराली जलाने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। शासन- प्रशासन की मनाही के बावजूद किसान रोजाना खेतों में आग लगा रहे हैं। इसी लापरवाही के कारण आए दिन आगजनी की घटनाएं हो रही हैं। केशडबरी के पास हुई इस घटना ने न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुँचाया है, बल्कि सड़क से गुजरने वाले राहगीरों की सुरक्षा पर भी सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। उल्लेखनीय है कि लोक निर्माण विभाग द्वारा हर साल सड़क मरम्मत, किनारों की साफ-सफाई और रोड सेफ्टी के नाम पर लाखों- करोड़ो रुपये का बजट खर्च किया जाता है। इसके बावजूद सड़क किनारे खड़े सूखे पेड़ों और ज्वलनशील कचरे को हटाने की जहमत नहीं उठाई जाती है। केशडबरी के ग्रामीणों का कहना है कि यदि विभाग समय रहते सक्रिय होता और सूखे पेड़ की छंटाई या सफाई की जाती, तो यह घटना नहीं होती। यह लापरवाही विभाग की उदासीनता एवं निष्क्रियता को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। वही इस गंभीर लापरवाही और सड़क सुरक्षा में सेंध लगने के संबंध में जब पीडब्ल्यूडी कोदवा सेक्शन के सब-इंजीनियर संदीप शर्मा से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने कोई जवाब नही दिया।
