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शिवनाथ तटीय क्षेत्रों में भीषण गर्मी के बावजूद प्यासी जमीन पर लहलहा रहा धान,प्रशासन की मनाही बेअसर.

​बेमेतरा:- भीषण गर्मी और गिरते जलस्तर की चेतावनी के बावजूद बेमेतरा जिले के शिवनाथ नदी तटीय इलाकों में हरियाली का विरोधाभास देखने को मिल रहा है। प्रशासन द्वारा भूजल संरक्षण के लिए प्रतिबंधित किए जाने के बाद भी करीब तीन दर्जन गांवों के किसानों ने बड़े पैमाने पर धान की धान की दूसरी फसल उगाई है, जो शिवनाथ नदी के पानी एवं भूजल श्रोत का जमकर दोहन कर रहे है। विदित हो कि ज़िला प्रशासन द्वारा पूर्व में जल संकट को देखते हुए जिला प्रशासन ने धान की खेती पर रोक लगाई थी, लेकिन जागरूकता की कमी और प्रशासनिक कड़ाई न होने से बुवाई जारी रही। चूंकि इन दिनों धान की फसल पकने के अंतिम दौर है, जिसमें पानी की अत्यधिक खपत हो रही है। इस भूजल दोहन से अंचल के भूजल स्तर में भारी गिरावट की आशंका है। हालांकि सूरज की तेज तपती धूप और उमस के बीच शिवनाथ के किनारे लहलहाते खेत की हरियालीनुमा नज़ारे राहत के साथ आँखों को सुकून दे रहा है। किन्तु वास्तव में देखा जाए तो यह आगामी भविष्य के जल संकट की आहट भी है। फलस्वरूप समूचे ज़िले में सरकारी हिदायत के बाद भी प्रशासनिक निष्क्रियता के चलते शिवनाथ नदी के तटीय इलाकों के किसान बेखौफ होकर पानी का दोहन कर रहे हैं। फिलहाल समय रहते वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा नहीं दिया गया, तो जिले को गंभीर जल किल्लत का सामना करना और गम्भीरतापूर्वक करना पड़ सकता है।

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