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दुर्ग में ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क का भंडाफोड़: 3 अंतर्राज्यीय आरोपी गिरफ्तार, भारी मात्रा में बैंक दस्तावेज और गैजेट्स बरामद

भिलाई/दुर्ग। दुर्ग पुलिस ने ऑनलाइन जुआ-सट्टे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक अंतर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। खुर्सीपार थाना पुलिस और एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट की संयुक्त टीम ने खुर्सीपार आईटीआई मैदान के पास दबिश देकर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी ‘म्युल अकाउंट’ (Mule Account) के जरिए ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क संचालित कर रहे थे।

​गरीब लोगों को बनाते थे निशाना

​पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद लोगों को पैसों का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे। खाता खुलने के बाद, आरोपी उन लोगों से पासबुक, एटीएम कार्ड, चेकबुक और सिम कार्ड अपने कब्जे में ले लेते थे। इन खातों का उपयोग वे “अन्ना रेड्डी” नामक ऑनलाइन बेटिंग ऐप के माध्यम से सट्टे से प्राप्त अवैध धनराशि को इधर-उधर करने और अपनी पहचान छिपाने के लिए करते थे।

​रांची से संचालित हो रहा था नेटवर्क

​प्रारंभिक पूछताछ में पता चला है कि गिरोह का मुख्य संचालन आईपीएल सीजन के दौरान रांची (झारखंड) से किया जा रहा था। आरोपी बेहद शातिर तरीके से अलग-अलग मोबाइल नंबरों और बैंक खातों का इस्तेमाल कर रहे थे ताकि पुलिस और जांच एजेंसियों की पकड़ से बच सकें।

​भारी मात्रा में सामान जब्त

​पुलिस ने आरोपियों के पास से अवैध वित्तीय लेन-देन में इस्तेमाल किए जा रहे उपकरणों का जखीरा बरामद किया है:

  • एटीएम कार्ड: 81 नग
  • बैंक पासबुक: 62 नग
  • मोबाइल फोन: 13 नग
  • चेकबुक: 05 नग
  • अन्य: लैपटॉप, हार्ड डिस्क और 11 सिम कार्ड। जब्त की गई सामग्री की कुल अनुमानित कीमत लगभग 2.50 लाख रुपये है।

​इन धाराओं में दर्ज हुआ मामला

​दुर्ग पुलिस ने तीनों आरोपियों—अजय मिश्रा (23), दीपक कुमार (32, निवासी नालंदा, बिहार) और करण कुमार सिंह (26)—के विरुद्ध थाना खुर्सीपार में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(2), 318(3), 318(4), 319 तथा छत्तीसगढ़ जुआ (प्रतिषेध) अधिनियम 2022 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।

​पुलिस की सख्त चेतावनी

​दुर्ग पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी को भी अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड या सिम कार्ड उपयोग करने के लिए न दें। आपके नाम पर खुले खाते का दुरुपयोग साइबर अपराध, मनी लॉन्ड्रिंग और सट्टेबाजी में हो सकता है, जिसके लिए अंततः खाताधारक ही जिम्मेदार होगा। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत नजदीकी थाने या साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर दें।

​इस सफल ऑपरेशन में थाना खुर्सीपार पुलिस और एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट की टीम का विशेष योगदान रहा।

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