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विकास की दौड़ में पिछड़ा पशु विभाग: जान हथेली पर रखकर इलाज कराने पहुंच रहे ग्रामीण

■बेमेतरा:- जिले में पशु विभाग की स्थिति इन दिनों काफी दयनीय और चिंताजनक बनी हुई है। जिला मुख्यालय सहित अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित पशु चिकित्सालय और पशु औषधालय के भवन पूरी तरह जर्जर एवं खस्ताहाल हो चुके हैं। हालात इतने बदतर हैं कि अपनी जान जोखिम में डालकर डॉक्टर और पशुओं के इलाज के लिए दूर-दूर से आने वाले ग्रामीण इसी जर्जर इमारत में उपचार कराने को मजबूर हैं।

दरअसल ​शासन और प्रशासन की बेरुखी के चलते बेमेतरा जिले में अन्य सभी विभागों के लिए तो शानदार और सर्वसुविधायुक्त भवनों का निर्माण करा दिया गया है, लेकिन पशु विभाग इस विकास से पूरी तरह अछूता रह गया है। विभाग में व्यवस्थाओं को सुधारने की अपार गुंजाइश है, बावजूद इसके जिम्मेदार अधिकारियों और शासन स्तर पर इस गंभीर समस्या की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

चूंकि ​वर्तमान स्थिति पर नजर डालें तो जिला मुख्यालय के मुख्य पशु चिकित्सालय के अलावा नवागढ़, नांदघाट, दाढ़ी, थान खम्हरिया, देवकर, परपोड़ी, साजा, बेरला और देवरबीजा सहित करीब 10 महत्वपूर्ण स्थानों पर पशु चिकित्सा केंद्र स्थापित हैं। इन सभी केंद्रों पर मवेशियों का इलाज और उपचार किया जाता है, लेकिन भवनों की खस्ता हालत ने यहां आने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

फिलहाल ​इन सभी केंद्रों के अलावा ग्रामीण इलाकों में कई पशु औषधालय भी संचालित किए जा रहे हैं, जिनकी देखरेख की जिम्मेदारी सहायक पशु शल्य चिकित्सा अधिकारियों और विकासखंड पशु चिकित्सा अधिकारियों के कंधों पर है। चूंकि स्थानीय लोगों और पशुपालकों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द इन जर्जर भवनों का जीर्णोद्धार कराया जाए ताकि पशुओं का सुचारू और सुरक्षित इलाज हो सके।

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