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●देवकर ग्रामीण अंचल में पारम्परिक उल्लास व संस्कृति के साथ धूमधाम से मना हरेली पर्व●

■देवकर/सहसपुर:- देवकर अंचल के ग्रामीण इलाकों में विगत बुधवार को प्रदेश की पारंपरिक पर्व के रूप हरेली त्यौहार बड़े ही हर्षोल्लास व उत्साह के साथ मनाया गया। इस दौरान दिनभर पारंपरिक उल्लास और संस्कृति के साथ ही हरेली पर्व, गाँवों में गूंजे लोकगीत और उत्साह
​छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध और प्रथम लोक पर्व
हरेली की धूम देवकर क्षेत्र के ग्रामीण अंचलों में पूरी पारंपरिक भव्यता और हर्षोल्लास के साथ देखने को मिली। इस अवसर पर ग्राम सहसपुर, नवकेशा, बुंदेली, काँचरी, हरडुवा, लालपुर, डेहरी, पेण्ड्रावन, गाडाडीह, अकलवारा, मोहगांव, राखी-जोबा और खिसोरा सहित तमाम गाँवों में विशेष उत्सव का माहौल रहा। इस पर्व को लेकर फिलहाल सुबह से ही ग्रामीणों में गजब का उत्साह नजर आया, जिससे पूरा ग्रामीण जीवन छत्तीसगढ़ी की पारंपरिक संस्कृति के रंग में सराबोर दिखाई दिया। हालाँकि ​पर्व की शुरुआत के तहत ग्रामीणों ने अपने-अपने घरों के आंगनों और मुख्य द्वारों पर नीम की ताजी शाखाएं स्थापित कीं। लोक मान्यता के अनुसार, नीम को औषधीय गुणों का भंडार और बुरी बलाओं को दूर करने वाला प्रतीक माना जाता है, जिससे घर-परिवार की सुख-समृद्धि और आरोग्यता की कामना की गई। इसके साथ ही, किसानों ने सुबह-सवेरे स्नान कर अपने खेतों में उपयोग होने वाले पारंपरिक कृषि उपकरणों, नागरा, नांगल, गैंती, और कुदाल समेत सभी औजारों की पूरी विधि-विधान और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना की। ततपश्चात क्षेत्र के ​अन्नदाताओं ने अच्छी फसल की कामना करते हुए धरती माता को नमन किया और अपने गोवंश (बैलों व मवेशियों) को भी विशेष आहार व नमक-चावल खिलाकर उनकी पूजा की। इस दौरान गाँवों में पारंपरिक गेंड़ी दौड़, नारियल फेंक प्रतियोगिता और छत्तीसगढ़ी व्यंजनों की महक ने माहौल को और भी सुहाना बना दिया। परिणामस्वरूप देवकर ग्रामीण क्षेत्र के इन गाँवों में हरेली का यह पर्व कृषि संस्कृति एवं ग्रामीण पारम्परिक आस्था के रूप में बड़े ही धूमधाम से मनाया गया।

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