■बेरला/बेमेतरा/दुर्ग:- सिंचित क्षेत्र विकास प्राधिकरण (काडा) संभाग रायपुर के अंतर्गत बेमेतरा विधानसभा क्षेत्र में एक बार फिर सरकारी धन के दुरुपयोग और ठेकेदारी राज का बड़ा मामला सामने आया है। तहसील मुख्यालय बेरला और ग्राम सोढ़ से महज 3-3 किलोमीटर की दूरी पर, काडा सब-डिवीजन दुर्ग द्वारा लगभग 80 लाख रुपये की लागत से निर्मित ढाई किलोमीटर लंबी नहर लाइन संरचना (05 वीआरबी सहित) भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण की भेंट चढ़ चुकी है। पिछले ही महीने पूर्ण हुए इस निर्माण में तकनीकी मापदंडों और गुणवत्ता की जमकर धज्जियां उड़ाई गई हैं। आलम यह है कि उद्घाटन से पहले ही समूची पक्की नहर संरचना और नव-निर्मित वीआरबी (विलेज रोड ब्रिज) में जगह-जगह पर गहरी दरारें उभर आई हैं, जो निर्माण में प्रयुक्त स्तरहीन मटेरियल की पोल खोल रही हैं।

दरअसल इस 80 लाख रुपये की महत्वाकांक्षी परियोजना का मुख्य उद्देश्य सोढ़ वितरक नहर (ब्रांच कैनाल) को ग्राम तरकोरी के नाले से जोड़ना था, ताकि आसपास के सैकड़ों किसानों के खेतों तक फील्ड चैनल के माध्यम से सिंचाई का पानी सुगमता से पहुंच सके। लेकिन निर्माण से कार्यस्वरूप इसके उलट है। ठेकेदार की मनमानी इस कदर हावी रही कि पक्की संरचना से लेकर वीआरबी तक कहीं भी न तो नियमतः मुरम फिलिंग की गई और न ही कंक्रीट को मजबूती देने के लिए अनिवार्य वाटर क्युरिंग (तराई) की रस्म निभाई गई, जिससे निर्माण की कमजोरी नज़र आने लगी है। इसके साथ तरकोरी गाँव व मोहरेंगा के बीच काडा नहर लाइन निर्माण के कार्यस्थल पर इन दिनों न कोई सूचना पटल है और न ही निर्माण पट्टिका। वही कार्य के दौरान विभागीय अधिकारियों की निरंतर मॉनिटरिंग और निरीक्षण का पूरी तरह अभाव देखा गया, जिसके चलते ठेकेदार को खुलेआम तकनीकी मापदंडों से समझौता करने की छूट मिल गई। फलस्वरूप क्षेत्र में काडा की इस घटिया निर्माण से सरकारी राशि की बर्बादी भी हो रही है।
तांदुला परिक्षेत्र में अन्य निर्माण का भी यही हाल, जांच के घेरे में काडा विभाग:
काडा और जल संसाधन विभाग के अंतर्गत निर्माण में लापरवाही का यह कोई इकलौता मामला नहीं है। ऐसा क्षेत्र में कई और स्तरहीन तथा गुणवत्ताविहीन निर्माण कार्य तांदुला परिक्षेत्र में अंजाम दिया गया है, जिस पर निर्माण पूर्ण होने के बाद से ही लगातार उंगलियां उठ रही हैं। फिलहाल दोनों ही मामलों में करोड़ों की सरकारी राशि दांव पर लगी है, लेकिन धरातल पर किसानों को इसका रत्ती भर लाभ मिलता नहीं दिख रहा है। क्षेत्र के पीड़ित और आक्रोशित किसानों का कहना है कि यदि इस घटिया निर्माण की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच नहीं कराई गई, तो पहली ही तेज बारिश में यह पूरी संरचना ढह जाएगी।
ऑफिस के बस्तर शिफ्टिंग की आड़ में अंतिम खेल की चर्चा तेज
इस पूरे घटिया निर्माण के पीछे एक बड़ी प्रशासनिक वजह भी तैर रही है। जिसमे विभागीय गलियारों में यह चर्चा बेहद तेज है कि काडा (सिंचित क्षेत्र विकास प्राधिकरण) परियोजना को शासन द्वारा आगामी दिनों में बोधघाट परियोजना’ में तब्दील किया जा रहा है। इसी फेरबदल के चलते रायपुर, दुर्ग और गंगरेल में स्थित काडा के सब-डिवीजन कार्यालयों को यहां से हमेशा के लिए बंद कर बस्तर संभाग में स्थानांतरित (शिफ्ट) करने की तैयारी चल रही है। कयास लगाए जा रहे हैं कि विभाग के अधिकारी और ठेकेदार इसी दफ्तर समेटने की हड़बड़ी का फायदा उठा रहे हैं, ताकि जाते-जाते बिना जवाबदेही के आधे-अधूरे और स्तरहीन कार्यों का भुगतान कराकर अपनी जेबें गर्म की जा सकें। इस सम्बंध में काडा सबडिवीजन के इकलौते ऑफिसकर्मी से बात करने पर बताया कि न यहां कोई भी काम है, न अधिकारी, न स्टॉफ। जानकारी चाहिए तो रायपुर सब डीविजन से लेलो। वही इस विभाग के एसडीओ व इंजीनियर से संपर्क किया गया तो कोई प्रतिक्रिया नही दी।
