

मुदस्सर मोहम्मद✍️
■देवकर:- देवकर नगर क्षेत्र में आगामी गणेशोत्सव पर्व को लेकर तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। जिदमे विघ्नहर्ता भगवान श्रीगणेश की अगवानी के लिए जहां एक ओर पूजा समितियां पांडालों को सजाने में जुटी हैं, वहीं दूसरी ओर स्थानीय मूर्तिकार बप्पा की आकर्षक और मनमोहक प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में रात-दिन एक किए हुए हैं। आगामी 14 सितम्बर को गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर इन मूर्तियों की स्थापना क्षेत्र के विभिन्न पूजा पंडालों व घरों में की जाएगी, जहां पूरे 11 दिनों तक बप्पा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना होगी और तत्पश्चात नदी में पर्यावरण अनुकूल तरीके से विसर्जन किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि पर्यावरण संरक्षण की मिसाल पेश करते हुए देवकर के मूर्तिकार पूर्णतः प्राकृतिक सामग्रियों का उपयोग कर रहे हैं। प्रतिमाओं के निर्माण में सुरही नदी के किनारे की विशेष चिकनी मिट्टी, लकड़ियों और प्राकृतिक रंगों का ही इस्तेमाल किया जा रहा है। इस सम्बंध में स्थानीय मूर्तिकार नरसिंह चक्रधारी ने बताया कि प्रतिवर्ष की तरह इस बार भी गणेशोत्सव के लिए महीने भर पहले से ही मूर्तियों का निर्माण शुरू कर दिया गया था। श्रद्धालुओं और गणेशोत्सव समितियों की मांग के अनुसार छोटी प्रतिमाओं से लेकर कई फीट ऊंची भव्य प्रतिमाएं तैयार की जा रही हैं, जिनकी कीमत 500 रुपये से लेकर 10,000 रुपये तक रखी गई है। फिलहाल मूर्तियों पर बारीक नक्काशी और रंग-रोगन कर उन्हें अंतिम रूप दिया जा रहा है।
देवकर में मूर्तिकला केवल एक व्यवसाय नहीं, बल्कि कई पीढ़ियों और दशकों से चली आ रही एक अनूठी सांस्कृतिक धरोहर है। यहाँ के लगभग 4-5 स्थानीय परिवारों के लिए यह कला उनकी जीविका का मुख्य साधन बनी हुई है। पिछले 20-25 वर्षों से इस कार्य में लगे वरिष्ठ मूर्तिकार सनत चक्रधारी का कहना है कि सुरही नदी के पास होने के कारण उन्हें आसानी से उत्तम किस्म की चिकनी मिट्टी मिल जाती है, हालांकि इस प्राकृतिक कला में अत्यधिक शारीरिक मेहनत और बारीक हुनर की आवश्यकता होती है। मिट्टी को गुंथे जाने से लेकर आकार देने तक की पूरी प्रक्रिया में महीनों का समय लगता है।
देवकर की बनी गणेश प्रतिमाओं की मांग केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि आसपास के दो से तीन दर्जन गांवों के लोग और गणेशोत्सव समितियां महीनों पहले से ही यहाँ आकर मनपसंद प्रतिमाओं की बुकिंग करा लेते हैं। फिलहाल दूर-दराज से आने वाले भक्तों की विशेष पसंद और धार्मिक मान्यताओं को ध्यान में रखते हुए मूर्तिकार बप्पा के विभिन्न स्वरूपों को साकार करते हैं। अब जब गणेश चतुर्थी में कुछ ही दिन शेष रह गए हैं, देवकर की इन कार्यशालाओं में बप्पा के जयकारों के साथ अंतिम तैयारियों का दौर अपने चरम पर है।
