■बेमेतरा:- भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप के इस दौर में शरीर को प्राकृतिक रूप से शीतलता प्रदान करने वाली ककड़ी अब स्थानीय बाजारों से पूरी तरह नदारद हो गई है। जिससे आम उपभोक्ताओं को भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। चूंकि ज़िले में इस साल मौसम के बदलते मिजाज और प्रतिकूल जलवायु के कारण ककड़ी की पैदावार में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिसका सीधा असर अब बाजार की आपूर्ति श्रृंखला पर दिखाई दे रहा है। आलम यह है कि बेमेतरा जिले के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों और ग्रामीण अंचलों, जिनमें विशेष रूप से बेरला, साजा, नवागढ़, देवकर, नांदघाट, भिम्भौरी, दाढ़ी, खण्डसरा, थानखम्हरिया और देवरबीजा शामिल हैं, वहां ककड़ी की मांग तो चरम पर है लेकिन स्टॉक लगभग समाप्त हो चुका है। सीमित आवक की वजह से जो थोड़ी-बहुत ककड़ी बाजार में पहुंच भी रही है, उसे विक्रेता मनमाने और आसमान छूते दामों पर बेच रहे हैं, जिससे यह अब मध्यमवर्गीय परिवारों की पहुंच से दूर होती जा रही है। भीषण तपिश के इस मौसम में जहां लोग डिहाइड्रेशन से बचने के लिए ककड़ी का सहारा लेते थे। वहीं अब इसकी अनुपलब्धता और अत्यधिक महंगाई ने आम आदमी की चिंताएं और अधिक बढ़ा दी हैं। नगर बेरला के स्थानीय फल एवं सब्जी विक्रेताओं से बात करने पर बताया कि पूरे बेरला में कही भी सब्जी या फल के स्टॉल पर ककड़ी नही बिक रहा है, जबकि लेने के लिए काफी डिमाण्ड है। वही मण्डी में आवक सीमित रूप में होने से जो ककड़ी कभी 20 रुपये किलो बिक रहा था, वो आज 100 किलोग्राम के भाव पर कही कही ही बिक रहा है। जबकि ककड़ी गर्मी के सीजन में मौसमी सब्जियों व फलो के रूप आमजन की थाली पर सलाद के रूप उपयोग होता है। फिलहाल मार्केट से ककड़ी की कमी ने यह आमजन की पहुँच से दूर हो गया है।

