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स्टाफ की कमी से वेंटिलेटर पर आरईएस ऑफिस, अकेले वन मैन आर्म बने साज एसडीओ, राम भरोसे हुआ कामकाज व्यवस्था●

◆​साजा में उच्च अफसरों की अनदेखी से बेदम हुआ आरईएस विभाग, बिना स्टाफ कामकाज से अकेले जूझ रहे एसडीओ

■बेमेतरा:- जिला ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (आरईएस) संभाग के अंतर्गत साजा सब-डिवीजन कार्यालय इन दिनों विभागीय निष्क्रियता और घोर लापरवाही का जीवंत उदाहरण बन चुका है। आलम यह है कि पूरे दफ्तर की जिम्मेदारी वर्तमान में अकेले साजा आरईएस के अनुविभागीय अधिकारी गणेश मण्डारे के कंधों पर टिकी है। ऑफिस का ताला खोलने से लेकर, फील्ड निरीक्षण, बैठकों में शामिल होना और कंप्यूटर पर बाबू का काम करना सहित सब कुछ उन्हें महीनों से अकेले ही संभालना पड़ रहा है, जिससे वे अपने विभाग में परेशान होकर वन मैन आर्मी बनने को मजबूर हैं। हालांकि विभागीय नाकामी का स्तर देखिए कि इस विकट स्थिति से निपटने के लिए महज एक दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी दिया गया है, जिसे पिछले तीन महीनों से वेतन तक नसीब नहीं हुआ है। फिलहाल दफ्तर में न चपरासी है, न कंप्यूटर ऑपरेटर, न बाबू, न वाहन चालक और न ही कोई उपयंत्री (सब-इंजीनियर)। हद तो यह है कि विभाग के पास साजा में अपनी खुद की बिल्डिंग तक नहीं है, जिससे सीमित और जर्जर व्यवस्थाओं के बीच शासकीय कार्यों का दम घुट रहा है, जो इन दिनों बड़े ही चर्चे का विषय है। बताया जा रहा है कि पूर्व में इस कार्यालय में सीमा से अतिरिक्त स्टॉफ मौजूद था, फिर इंजीनियरों के लगातार अन्यत्र तबादला व पदोन्नति कर बाद सब इंजीनियर के पद खाली हो गए वही ऑपरेटर, चपरासी व बाबू के पोस्ट पर डेलीविजेस के अस्थायी कर्मचारियों ने वेतन न मिलने पर दफ्तर छोड़ दिया जिसमें वर्तमान एसडीओ के पदस्थापना के बाद से लगातार स्टॉफ की संकट से यह ऑफिस जूझ रहा है किन्तु कोई हल नही है। जबकि कामकाज का बात किया जाए तो इस पूरे विकासखण्ड में जनपद व स्थानीय ग्राम पंचायत स्तर के सैकड़ो कार्य है जिसमे से फिलहाल कई विकास कार्य निर्माण से लेकर स्वीकृति के चरणों में है, जिसमे कामकाज का बोझ ऑफिस में काफी बढ़ गया है।

शासकीय ​नियमों की धज्जियां उड़ाकर तकनीकी सहायकों से लिया जा रहा काम
फिलहाल ऑफिस में ​एक भी रेगुलर सब-इंजीनियर न होने के कारण विभागीय कामकाज को खींचने के लिए जनपद पंचायत के तकनीकी सहायकों (टीए) से जबरन काम लिया जा रहा है, जो सीधे तौर पर शासन के नियमों और उच्च आदेशों का उल्लंघन है। गौरतलब है कि बीते महीने ही ग्रामीण पंचायत विभाग द्वारा पूरे प्रदेशभर में स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं कि जनपद में पदस्थ तकनीकी सहायकों की जवाबदारी केवल मनरेगा कार्यों की देखरेख तक सीमित रहेगी और उनसे अन्य विभागीय कार्य लेना पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके बावजूद, साजा में धड़ल्ले से नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। नियमों के विपरीत जाकर लिए जा रहे इस सहयोग से न सिर्फ विकास कार्यों की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों के बुनियादी ढांचे से जुड़े निर्माण कार्यों में भी भारी बाधा और परेशानी उत्पन्न हो रही है।

​मामले में अधिकारियों की उदासीनता चरम पर, सुध लेने वाला कोई नहीं
चूंकि ​हैरानी की बात यह है कि इस सब-डिवीजन कार्यालय में नियमानुसार करीब 05 उप अभियंता (सब-इंजीनियर) सहित बाबू, सहायक और अन्य स्टाफ मिलाकर करीब दर्जनभर पद स्वीकृत हैं, जो लंबे समय से खाली पड़े हैं। बेमेतरा जिले के अन्य आरईएस सब-डिवीजन कार्यालयों में पर्याप्त स्टाफ मौजूद है, जहाँ से महज कुछ कर्मचारियों का तबादला या अटैचमेंट कर साजा की इस बड़ी समस्या का सीधा समाधान किया जा सकता है। लेकिन, उच्च अधिकारियों को इस बदहाली की पूरी जानकारी होने के बावजूद कोई सुध लेने को तैयार नहीं है। हाल ही में विभाग की अधीक्षण यंत्री भूमिजा गबेल ने इस कार्यालय का आधिकारिक दौरा भी किया था, लेकिन उन्होंने भी इस गंभीर संकट पर ध्यान देना मुनासिब नहीं समझा। वही जब इस विषय पर ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग के मुख्य अभियंता (रायपुर) राम सागर से बात की गई, तो उन्होंने अतिरिक्त बिल्डिंगों में दफ्तर संचालन की बात तो स्वीकारी, लेकिन कर्मचारियों की कमी के मुद्दे पर पूरा ठीकरा बेमेतरा कार्यपालन अभियंता (ईई) महाजन बाँधड़े की जिम्मेदारी और जवाबदेही पर फोड़कर अपना पल्ला झाड़ लिया।

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