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●मोहर्रम पर कोंगियाकला में दिखा गंगा-जमुनी तहज़ीब की खूबसूरत मिसाल, हिंदू-मुस्लिम भाइयों ने मिलकर मनाया त्यौहार●

■​बेमेतरा:- मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना की सदियों पुरानी साझी संस्कृति को चरितार्थ करते हुए बेमेतरा के साजा विकासखंड अंतर्गत सीमावर्ती ग्राम कोंगिया कला एवं छिराहीडीह में कौमी एकता की एक बेहद खूबसूरत तस्वीर देखने को मिली। यहाँ मोहर्रम का मुकद्दस त्यौहार हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों ने पूरी अकीदत, अदब और अटूट सामाजिक समरसता के साथ पारंपरिक ढंग से मनाया। इस ऐतिहासिक और पावन अवसर पर ग्राम के पूर्व मालगुजार व छुईखदान ब्लॉक के पूर्व सरपंच संघ अध्यक्ष रणजीत सिंह चंदेल तथा गंडई मंडी समिति के पूर्व अध्यक्ष संजू सिंह चंदेल विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। अतिथियों ने ग्रामीणों के साथ इस उत्सव में सहभागिता करते हुए क्षेत्र की सुख, समृद्धि और आपसी भाईचारे को अक्षुण्ण बनाए रखने की कामना की, जहाँ भारी संख्या में मौजूद प्रबुद्ध जनों और जनप्रतिनिधियों का मुस्लिम समाज सहित ग्रामीणों द्वारा द्वारा आत्मीय स्वागत किया गया।

​इस भव्य आयोजन के दौरान गाँव के मुस्लिम भाइयों द्वारा निर्मित बेहद आकर्षक और नक्काशीदार ताज़िये को उठाने और जुलूस निकालने में हिंदू-मुस्लिम युवाओं ने कंधे से कंधा मिलाकर अपनी अटूट सहभागिता दर्ज की। इसके साथ ही गाँव में आयोजित पारंपरिक मेले ने उत्सव की रौनक को दोगुना कर दिया, जहाँ भारी संख्या में उमड़े ग्रामीण महिला, पुरुष और बच्चों ने स्वादिष्ट व्यंजनों, चाट-पकौड़ों और रंग-बिरंगे खिलौनों का आनंद लिया।फिलहाल कोंगियाकला समूचे क्षेत्र में इंसानियत और कौमी एकता का संदेश देने वाले इस आयोजन में पूरे गाँव का अनुशासित व सामूहिक सहयोग सराहनीय रहा। इस दौरान ग्राम प्रमुखों और अतिथियों ने दुआ की, कि कोंगिया कला छिराहीडीह की यह गौरवशाली साझी संस्कृति हमेशा कायम रहे और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अद्वितीय मार्गदर्शक बनी रहे।

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