
◆बेमेतरा:- प्रदेश के सबसे अग्रणी कृषि प्रधान एवं संपन्न जिलों में शुमार बेमेतरा में इस समय मानसून की बेरुखी ने इन दिनों हाहाकार मचा दिया है। जिले के चारों विकासखंडों और सभी नौ तहसील क्षेत्रों में पिछले एक सप्ताह से लगातार बारिश न होने के कारण खेतों की उपजाऊ मिट्टी सूखकर कड़क हो चुकी है और उनमें बड़ी-बड़ी दरारें दिखाई देने लगी हैं। उमस और तीखी धूप के कारण खेतों की नमी पूरी तरह गायब हो चुकी है, जिससे अंकुरित धान की कोमल फसल अब सूखने एवं फसल बर्बाद होने की आशंका में ज़िले के किसान चिंतित व परेशान है ।
दरअसल बेमेतरा ज़िला वन विहीन ज़िला होने के कारण कृषि प्रधान व सम्पन्न में अग्रणी जिला माना जाता है।वही यहां की पूरी अर्थव्यवस्था ग्रामीण अंचल की खेती पर टिकी है, ऐसे में पानी का यह गंभीर संकट पूरे बेमेतरा के लिए एक बड़ी मुसीबत बनकर खड़ा होना स्वभाविक है।
फिलहाल बरसात के इस दौर में सूखे जैसे प्राकृतिक मार से बेमेतरा का किसान बेहद हताश, मायूस और गहरे मानसिक तनाव में नज़र आ रहे है।बताया जा रहा है कि जिले के किसान बन्धुओ ने सहकारी सोसायटियों और साहूकारों से भारी-भरकम कर्ज लेकर, साथ ही अपनी जीवनभर की जमा-पूंजी दांव पर लगाकर खाद, उन्नत बीज और रोपाई का खर्च उठाया था।वही धान के पौधों की रोपाई करने के पश्चात खेतों में इस वक्त सबसे ज्यादा पानी की जरूरत होती है, ताकि उनमें अंकुरण फूट सकें, लेकिन लगातार हफ्तेभर से बारिश न होने तथा वक्त पर पानी न मिलने से पौधे पीले पड़ने लगे हैं। यदि आगामी एक-दो दिनों के भीतर क्षेत्र में अच्छी बारिश नहीं हुई, तो फसलों पर इसका विकराल व विनाशकारी प्रभाव पड़ने की सम्भावना नज़र आ रही है। जिसमे धान के पौधे पूरी तरह झुलसने की आशंका है।लिहाजा इस संकट से किसानों के सामने लागत निकालना तो दूर, परिवार के भरण-पोषण और कर्ज चुकाने का बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा। फिलहाल संकट की इस घड़ी में जिन किसानों के पास साधन हैं, वे दिन-रात बोरवेल के सहारे खेतों में पानी पहुंचाकर किसी तरह अपनी फसल बचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं।हालांकि, लगातार गिरते भूजल स्तर के कारण कई बोरवेल अब हवा उगलने लगे हैं और हर छोटे-सीमांत किसान के पास सिंचाई की यह महंगी सुविधा उपलब्ध भी नहीं है। चूंकि दूसरी ओर देखे तो ज़िले के स्थानीय नहरों, तालाबों और पारंपरिक जलाशयों का जलस्तर भी तेजी से घटने के कारण सिंचाई के सारे पारंपरिक साधन जवाब दे चुके हैं। बारिश न होने पर पैदा हो रही इस विकट स्थिति ने किसानों को बेबस कर दिया है। किसानों की माने तो अगर आने वाले एक-दो दिनों में मौसम मेहरबान नहीं हुआ और राहत की बौछारें नहीं पड़ीं, तो कृषि संपन्न बेमेतरा जिला गंभीर सूखे की चपेट में आ जाएगा। फसल पूरी तरह चौपट होने की स्थिति में कर्ज के बोझ तले दबे किसानों के पास आजीविका के लिए पलायन करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा, जिससे पूरे जिले की अर्थव्यवस्था चरमरा जाएगी। फिलहाल, बेमेतरा का अन्नदाता सूखी और फटी जमीनों के बीच खड़ा होकर नम आंखों से आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठा है, और इंद्रदेव से जल्द से जल्द बरसाने की गुहार लगा रहा है।
