
बेमेतरा:- कृषि प्रधान बेमेतरा जिले के ग्रामीण अंचलों में इस समय खेती- किसानी का काम जोर पकड़ चुका है, जिसमे इन दिनों जैसे-जैसे धान के फसल कटाई का मौसम नजदीक आ रहा है, वैसे ही अन्नदाता किसानों ने अपनी पारंपरिक कृषि पद्धतियों को पीछे छोड़कर आधुनिक तकनीकों का रुख करना शुरू कर दिया है। हालांकि धान की मुख्य कटाई का कार्य मुख्य रूप से दीपावली के बाद पूरी रफ्तार से शुरू होगा, लेकिन किसानों की अग्रिम तैयारियों और खेतों की नब्ज को भांपते हुए अभी से ही विभिन्न क्षेत्रों में हार्वेस्टर मशीनें नजर आने लगी हैं। आधुनिक कृषि यंत्रों की यह समय से पहले आमद इस बात का स्पष्ट संकेत है कि इस सीजन में फसल कटाई का कार्य अधिक सुगम और तीव्र गति से संपन्न होगा।
दरअसल ग्रामीण अंचलों में पारंपरिक तौर पर धान की कटाई- मिंजाई में महीनों का समय और भारी श्रम की आवश्यकता होती थी, जिससे किसानों पर लागत और समय दोनों का अत्यधिक दबाव रहता था। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में कृषि क्षेत्र में आई तकनीकी क्रांति ने पूरी तस्वीर बदल दी है। बेमेतरा क्षेत्र के जागरूक किसान अब समय की बचत और श्रम की कमी से निपटने के लिए बड़े पैमाने पर हार्वेस्टर जैसी आधुनिक मशीनों पर भरोसा जता रहे हैं। चूंकि अभी से ही गांवों में इन मशीनों की गूंज सुनाई देने लगी है, जो आने वाले दिनों में किसानों के लिए वरदान साबित होगी और वे बिना किसी विलंब के अपनी फसल समेट सकेंगे।
हालाँकि कृषि विशेषज्ञों और स्थानीय किसानों के अनुसार, दीपावली के ठीक बाद धान कटाई का मुख्य दौर आरंभ हो जाएगा, जिसके लिए अभी से ही हार्वेस्टर संचालकों और किसानों के बीच एडवांस बुकिंग व समन्वय का दौर शुरू हो चुका है। वही कम समय में बड़े रकबे की कटाई हो जाने से किसानों को अगली फसल की बुआई के लिए भी पर्याप्त समय मिल जाता है। बेमेतरा जिले के ग्रामीण इलाकों में हार्वेस्टर की यह शुरुआती दस्तक यह साबित करती है कि यहां का किसान अब खेती को आधुनिक और लाभकारी बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
