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बेरला जनपद की बदहाली: जब ‘पंचायत के मुखिया’ का घर ही सुरक्षित नहीं, तो गांव का क्या होगा?

बेमेतरा/बेरला: मानसून की पहली झमाझम बारिश ने ही बेरला जनपद पंचायत के प्रशासनिक दावों और वहां की लचर व्यवस्थाओं की कलई खोलकर रख दी है। मंगलवार शाम हुई तेज बारिश के बाद जनपद परिसर पूरी तरह जलमग्न हो गया, जिससे कार्यालय का परिसर किसी तालाब की तरह दिखाई देने लगा। घुटनों तक भरे पानी ने अधिकारी-कर्मचारी और फरियाद लेकर पहुंचे ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दीं।

​परिसर में जलभराव से जनजीवन अस्त-व्यस्त

​बारिश के दौरान देखते ही देखते जनपद परिसर के मुख्य द्वार से लेकर सभी कार्यालय कक्षों के सामने तक पानी भर गया। आलम यह था कि कर्मचारियों को जूते-चप्पल हाथ में लेकर पानी से होकर गुजरना पड़ा, जबकि कार्यालय पहुंचे ग्रामीणों और दोपहिया वाहन चालकों को भी भारी जद्दोजहद का सामना करना पड़ा। जलभराव के कारण जरूरी फाइलों और दस्तावेजों को सुरक्षित रखने की चिंता भी कर्मचारियों में बनी रही।

​मूलभूत सुविधाओं के अभाव पर उठे सवाल

​स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने इस स्थिति पर गहरा रोष व्यक्त किया है। उनका आरोप है कि हर साल जनपद परिसर में मरम्मत और जल निकासी व्यवस्था के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर परिणाम शून्य है।

​ग्रामीण रविंद्र भास्कर चौबे ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा:

“जब मुख्यालय स्थित जनपद कार्यालय का ही यह हाल है, तो क्षेत्र की पंचायतों में मूलभूत सुविधाओं की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। कागजों में राशि का बंदरबांट होता है, पर निकासी की बुनियादी व्यवस्था तक नहीं बन पाती।”

​आम जनता की अनदेखी और प्रशासनिक शिथिलता

​दूर-दराज के गांवों से अपनी समस्याओं के समाधान के लिए आए बुजुर्गों, महिलाओं और अन्य ग्रामीणों को घुटनों तक भरे पानी में घंटों खड़ा रहना पड़ा। परिसर में पानी की निकासी के लिए न तो उचित ढलान की व्यवस्था है और न ही पक्की नालियां बनी हैं, जिसके कारण हर साल बरसात में यही बदतर स्थिति बनती है। बार-बार समस्या सामने आने के बावजूद प्रशासन द्वारा कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है।

​स्थायी निराकरण और जांच की मांग

​क्षेत्र के जागरूक नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि:

  • ​जनपद परिसर में जलभराव की समस्या का तत्काल स्थायी समाधान किया जाए।
  • ​गत वर्षों में जल निकासी और मरम्मत के नाम पर खर्च की गई सरकारी राशि की उच्च स्तरीय जांच हो।
  • ​लापरवाही बरतने वाले संबंधित अधिकारियों और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

​लोगों का साफ कहना है कि जब तक प्रशासनिक स्तर पर ही विकास और सुविधाओं की स्थिति दुरुस्त नहीं होगी, तब तक ग्राम पंचायतों के विकास की उम्मीद करना बेमानी है।

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