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भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी ढाई किमी की काडा नहर, महज 03 महीने में ही जगह-जगह से दरकी, किसानों के खेतों में तबाही, विभाग ने साधी चुप्पी

■बेमेतरा:- ​बेरला क्षेत्र के तांदुला जलसंसाधन सब डिवीजन क्रमांक 04 के अंतर्गत सोढ़ मुख्य नहर से ग्राम तरकोरी तक नवनिर्मित काडा संरचनायुक्त छोटी नहर निर्माण के महज तीन महीने के भीतर ही भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही की पोल खोलकर रख दी है। करीब ढाई किलोमीटर लंबी इस महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजना का अस्तित्व बरसात के पहले महीने में ही खतरे में पड़ गया है, क्योंकि नहर का बड़ा हिस्सा जगह-जगह से धंसने और टूटने लगा है। फिलहाल गुणवत्ता के नाम पर हुआ यह खेल अब सीधे तौर पर सरकारी धन की खुली लूट और भ्रष्टाचार की दास्तां बयां कर रहा है।

देखा जाए तो इन दिनों ​स्थिति यह है कि क्षेत्र में नवनिर्मित यह छोटी नहर में सैकड़ों जगहों पर खतरनाक दरारें उभर आई हैं, जिससे इसकी उपयोगिता पूरी तरह प्रभावित हो चुकी है। जबकि खेतों तक सुचारू जलापूर्ति का दावा करने वाले विभागीय और ठेकेदारों के सारे मंसूब्रे पानी में मिल गए हैं। वही अब नहर के टूटने और क्षतिग्रस्त होने के कारण अब पानी सीधे5 किसानों के खेतों में अनियंत्रित रूप से घुस रहा है, जिसके चलते उनकी धान के रोपित पौधे के साथ पूरे फसल बर्बाद होने की कगार पर पहुंच गई हैं और अन्नदाताओं की मुश्किलें कई गुना बढ़ गई हैं।

इस मामले पर ​स्थानीय किसान राजू, कमल और मोनू सहित तमाम ग्रामीणों ने सिंचाई विभाग की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोलते हुए इसे बड़ा घोटाला करार दिया है। जिसमे स्थानीय किसानों का सीधा आरोप है, कि निर्माण कार्य के दौरान न तो कोई इंजीनियर कभी साइट पर उचित रुओ में नजर आया और न ही उपसंभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने कभी ढंग का मुआयना करने की जहमत उठाई। लिहाजा ठेकेदार ने बेखौफ होकर घटिया और निम्नस्तरीय सामग्रियों का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया, इस नहर के इर्द-गिर्द मुरम फिलिंग की जगह मिट्टी व बजरी युक्त मटेरियल का उपयोग किया। इस प्रकार सम्बन्धित जिम्मेदार अधिकारियों की साठगांठ से जनता के उम्मीदों के कागजों को चन्द कमाई के लालच में ही ठिकाना लगा दिया।

​इस पूरे सनसनीखेज मामले को लेकर जब तांदुला जलसंसाधन संभाग दुर्ग के कार्यपालन अभियंता (ईई) आशुतोष सारस्वत से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क किया गया, तो उन्होंने फोन उठाना तक मुनासिब नहीं समझा। वहीं, उपसंभाग क्रमांक 04 के एसडीओ रोहन साहू ने मीडिया द्वारा मामला संज्ञान में लाए जाने के बाद खानापूर्ति करते हुए सिर्फ इतना कहा कि वे मामले की जानकारी लेकर दिखवाएंगे, जो विभागीय सुस्ती और असंवेदनशीलता को उजागर करता है। फिलहाल ​क्षेत्र के आक्रोशित किसानों और ग्रामीणों ने अब शासन और उच्च प्रशासन से इस दोहरी मार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने की मांग की है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि इस घटिया निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच करवाकर दोषी ठेकेदार और संरक्षण देने वाले भ्रष्ट अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाने की मांग की है।

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