रायपुर: छत्तीसगढ़ की पंचायती राज व्यवस्था में निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों की वास्तविक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने एक बेहद कड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी किया है कि पंचायतों में महिलाओं के लिए आरक्षण का उद्देश्य केवल औपचारिक प्रतिनिधित्व (कागजी खानापूर्ति) नहीं है, बल्कि उन्हें निर्णय प्रक्रिया का स्वतंत्र और प्रभावी हिस्सा बनाना है।
अक्सर देखा जाता है कि महिला सरपंच या जनपद सदस्य के चुने जाने के बाद उनके पति या अन्य पुरुष रिश्तेदार (प्रॉक्सी प्रतिनिधि) उनकी जगह बैठकों और कामकाज का संचालन करते हैं। नई व्यवस्था के तहत अब इस ‘प्रॉक्सी’ प्रथा पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।
1. बैठकों में रिश्तेदार बैन; बायोमीट्रिक और फेस रिकॉग्निशन से होगी जांच
विभाग द्वारा जारी नए निर्देशों के अनुसार, अब ग्राम पंचायत, जनपद एवं अन्य पंचायत बैठकों में केवल निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों को ही अनिवार्य रूप से उपस्थित होना होगा।
- कोई दूसरा व्यक्ति नहीं होगा शामिल: किसी भी रिश्तेदार, प्रतिनिधि या अन्य व्यक्ति को उनके स्थान पर बैठक में भाग लेने की अनुमति बिल्कुल नहीं होगी।
- तकनीक का सहारा: महिला जनप्रतिनिधियों की वास्तविक उपस्थिति को सत्यापित करने के लिए प्रशासन आवश्यकता पड़ने पर फेस रिकॉग्निशन (चेहरा पहचान प्रणाली) और बायोमीट्रिक अटेंडेंस जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग करेगा।
- डिजिटल पारदर्शिता: पंचायत बैठकों और ग्राम सभाओं की पूरी कार्रवाई को सभासार पोर्टल, निर्णय ऐप और अन्य अधिकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर नियमित रूप से अपलोड करना होगा।
2. पेसा क्षेत्रों में ‘महिला सभा’ अनिवार्य, मिलेगी ट्रेनिंग
महिला जनप्रतिनिधियों को प्रशासनिक और सामाजिक रूप से अधिक सक्षम और मुखर बनाने के लिए विभाग जमीनी स्तर पर काम करेगा:
- विशेष ट्रेनिंग: जिलों में जेंडर सेंसिटाइजेशन कार्यक्रम, नेतृत्व प्रशिक्षण और जागरूकता शिविर आयोजित किए जाएंगे।
- पेसा क्षेत्रों के लिए नियम: पेसा (PESA) कानून के अंतर्गत आने वाली पंचायतों में ग्राम सभा के आयोजन से पूर्व ‘महिला सभा’ आयोजित करना अनिवार्य कर दिया गया है।
- सामान्य क्षेत्र: सामान्य क्षेत्रों में भी महिला प्रतिनिधियों को स्वतंत्र रूप से अपनी बात रखने के लिए ‘महिला सभाओं’ के आयोजन के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
- सफलता की कहानियां होंगी शेयर: बेहतर काम करने वाली महिला प्रतिनिधियों की सक्सेस स्टोरी को सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से प्रचारित किया जाएगा ताकि अन्य महिलाएं भी प्रेरित हो सकें।
3. शिकायत पेटी लगेगी, अधिकारियों की तय होगी जवाबदेही
इस व्यवस्था को कड़ाई से लागू करने के लिए त्रि-स्तरीय पंचायत (जिला, जनपद एवं ग्राम पंचायत) स्तर पर प्रॉक्सी प्रतिनिधित्व (महिला के स्थान पर पति या रिश्तेदार के काम करने) से संबंधित शिकायतों के लिए ‘शिकायत पेटी’ लगाई जाएगी और एक प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र विकसित किया जाएगा।
अधिकारियों को अल्टीमेटम:
सरकार ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने और महिला जनप्रतिनिधियों की स्वतंत्र भागीदारी को अपनी व्यक्तिगत जिम्मेदारी के रूप में लेने को कहा है। लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर समयबद्ध कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए प्रशासन ने एक सप्ताह के भीतर पालन प्रतिवेदन (Compliance Report) प्रस्तुत करने और हर महीने की 5 तारीख तक नियमित प्रोग्रेस रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश जारी किए हैं।
