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ब्रिज विभाग की अनदेखी से अंधियारखोर में जर्जर पुल के भरोसे चमकेगी 43 किमी की नई सड़क, क्षेत्र में 05 दशक पुराने हेम्प सेतु पर मंडराया हादसों का साया

■बेमेतरा:- सेतु लोक निर्माण विभाग की निष्क्रियता एवं उदासीनता का एक और नज़ारा बेमेतरा ज़िला में इन दिनों देखने को मिल रहा है। दरअसल विगत वित्तीय वर्ष से मुंगेली से बेमेतरा के बीच करीब 43 किलोमीटर लंबी सड़क का चौड़ीकरण और मजबूतीकरण कार्य इन दिनों युद्ध स्तर पर प्रगति पर है। जिसमे करोड़ों की लागत से बन रहे इस मार्ग के बीच प्रशासनिक अदूरदर्शिता की एक बड़ी बानगी देखने को मिल रही है।फिलहाल ग्राम अंधियारखोर और पडकीडीह के बीच हाफ नदी पर बना करीब 5 दशक पुराना पुल आज भी उसी पुराने ढर्रे पर उपयोग में लाया जा रहा है। विडंबना यह है कि पूरी सड़क को नया और आधुनिक रूप दिया जा रहा है, लेकिन इस बेहद महत्वपूर्ण मार्ग पर एक नए उच्च स्तरीय पुल (हाई लेवल ब्रिज) के निर्माण को लेकर न तो निर्माण एजेंसी गंभीर है और न ही लोक निर्माण विभाग एवं ब्रिज विभाग। देखा जाए तो विभागीय उदासीनता के चलते अब यह साफ नजर आ रहा है कि चमचमाती नई सड़क का पूरा काम इस जर्जर और पुराने पुल के भरोसे ही छोड़ दिया जाएगा, जो भविष्य के लिए बेहद जोखिम भरा और जानलेवा साबित हो सकता है।

जानकारी के मुताबिक बेमेतरा से नवागढ़ के सड़क मार्ग पर ग्राम अंधियारखोर और पड़कीडीह के बीच हाफ नदी पर स्थित यह 300 फीट लंबा पुल तत्कालीन मध्यप्रदेश शासन के समय का है। जो साल 1971 से 1974 के बीच लोनिवि द्वारा महज 5 लाख 40 हजार रुपये की लागत से इसे हेम्प सेतु जलमग्न पुल के रूप में तैयार किया गया था। तब से लेकर आज तक बीते 52 सालों से यह ढांचा बिना किसी ठोस जीर्णोद्धार के लगातार भारी दबाव झेल रहा है। आज स्थिति यह है कि बेमेतरा से नवागढ़ होते हुए मुंगेली और बिलासपुर जाने वाले हजारों राहगीर रोजाना जान जोखिम में डालकर यहाँ से गुजरते हैं। कबीरधाम जिले से निकलने वाली हाफ नदी इस क्षेत्र की सबसे गहरी नदी मानी जाती है, जिसका जलस्तर सड़क और जमीनी सतह से काफी नीचे है। ऐसी भौगोलिक स्थिति में यहाँ छोटे पुल से काम चलाना मुमकिन नहीं है, बल्कि एक मजबूत और ऊंचे एप्रोच वाले हाई लेवल ब्रिज की दरकार है, जिसकी अनदेखी की जा रही है।

सेतु अफसरों ने साधी चुप्पी, चौड़ी सड़क पर संकरा पुल आमंत्रण दे रहा है बड़े हादसों को न्यौता
बहरहाल स्थानीय क्षेत्रवासियों और राहगीरों का साफ कहना है कि सड़क निर्माण की प्रगति को देखते हुए सेतु लोक निर्माण विभाग (ब्रिज कॉर्पोरेशन) को इसे गंभीरता से संज्ञान में लेना चाहिए था। यदि सड़क का चौड़ीकरण हो जाता है और पुल तथा उसका एप्रोच मार्ग पुराना और संकरा ही रह जाता है, तो दुर्घटनाओं का ग्राफ तेजी से बढ़ेगा। मरम्मत के अभाव में जर्जर हो चुका यह पांच दशक पुराना पुल कभी भी किसी बड़े हादसे का सबब बन सकता है। इस बेहद गंभीर और जनहित से जुड़े विषय पर जब जवाबदेह अधिकारियों का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो सेतु सम्भाग दुर्ग के कार्यपालन अभियंता- सी.के. पाण्डेय, कवर्धा सब डिवीजन के एसडीओ- बी.डी. शेन्डे और बेमेतरा ज़िला के सब-इंजीनियर एल.के. सिन्हा ने चुप्पी साध ली। जिसमे अधिकारियों द्वारा फोन पर कोई जवाब न देना यह साफ बयां करता है कि विभाग सड़क पर जनता की सुरक्षा को लेकर बेपरवाह है।

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