कबीरधाम। जिला पुलिस ने हत्या के एक बेहद गंभीर मामले में त्वरित कार्यवाही करते हुए आरोपी समधी को गिरफ्तार कर लिया है। आपसी विवाद में समधी ने ही अपने समधी पर लकड़ी के गेड़ा (डंडे) से ताबड़तोड़ वार कर उसकी हत्या कर दी थी। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से वारदात में इस्तेमाल लकड़ी का डंडा भी बरामद कर लिया है। आरोपी को न्यायालय में पेश कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
मकान की छत पर हुआ था खूनी संघर्ष
मिली जानकारी के अनुसार, घटना कबीरधाम जिले के कुकदुर थाना क्षेत्र के ग्राम लखनपुर की है। 17 मई को ग्राम निवासी मनीराम श्याम ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई कि 16 मई की रात करीब 8 से 9 बजे के बीच मकान की छत पर टहलू राम टेकाम और उसके समधी दुखीराम श्याम (निवासी दैहानटोला) के बीच किसी बात को लेकर विवाद शुरू हुआ। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि आरोपी दुखीराम श्याम ने पास ही रखे लकड़ी के गेड़ा से टहलू राम के सिर और कान पर जानलेवा हमला कर दिया। हमले में गंभीर चोट लगने के कारण टहलू राम की मौके पर ही मौत हो गई। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया था।
मौके पर पहुंची पुलिस, शुरू की तफ्तीश
हत्या की सूचना मिलते ही कुकदुर थाना पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची। पुलिस ने मकान की छत से मृतक टहलू राम टेकाम का लहूलुहान शव बरामद किया। पुलिस ने मौके पर देहाती मर्ग कायम कर पंचनामा की कार्यवाही पूरी की और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
74 वर्षीय आरोपी समधी गिरफ्तार
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कबीरधाम पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह के निर्देशन, एएसपी पुष्पेंद्र बघेल के मार्गदर्शन और एसडीओपी पंडरिया भूपत सिंह धनेश्री के पर्यवेक्षण में थाना प्रभारी कुकदुर निरीक्षक संग्राम सिंह के नेतृत्व में विशेष टीम गठित कर आरोपी की तलाश शुरू की गई।
पुलिस ने घेराबंदी कर आरोपी समधी दुखीराम श्याम (उम्र 74 वर्ष) को हिरासत में लिया। कड़ाई से पूछताछ करने पर आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त लकड़ी का डंडा विधिवत जब्त कर लिया है। आरोपी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर उसे गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया है।
इनकी रही सराहनीय भूमिका:
इस त्वरित कार्यवाही और आरोपी को दबोचने में कुकदुर थाने से सहायक उपनिरीक्षक शिवमोहन उपाध्याय, प्रधान आरक्षक मनोज तिवारी (262), आरक्षक संदीप पाण्डेय (503) और आरक्षक कृष्णा कुमार धुर्वे (914) की मुख्य व सराहनीय भूमिका रही।

