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करोड़ों की नहर परियोजना में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप: बारगाँव में लाइनिंग और रिमॉडलिंग कार्य पर उठ रहे सवाल

■बेमेतरा:- तांदुला जलसंसाधन संभाग दुर्ग के अंतर्गत सब डिवीजन 04 क्षेत्र के बेरला विकासखण्ड और बेमेतरा विधानसभा के ग्राम बारगाँव में चल रहा नहर लाइनिंग का जीर्णोद्धार और रिमॉडलिंग कार्य पूरी तरह से भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। जिसमे लगभग 353 लाख रुपये की भारी-भरकम लागत से स्वीकृत इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत बारगाँव नाला डायवर्शन के हेड का नवीनीकरण, 5700 मीटर लंबी नहर लाइनिंग, एक बांध, 09 वीआरबी और 15 कोलाबा का निर्माण किया जाना है, जो अभी प्रगति पर है। मगर धरातल पर विभागीय उदासीनता और ठेकेदार की बेलगाम मनमानी के चलते यह योजना किसानों के लिए वरदान साबित होने के बजाय एक बड़ा मज़ाक बनकर रह गई है, जिससे स्थानीय कृषकों में भारी आक्रोश उबल रहा है।
​इस घटिया निर्माण कार्य की पोल इसी बात से खुल जाती है कि नहर का निर्माण पूरा हुए अभी बमुश्किल कुछ ही महीने बीते हैं, लेकिन पूरी संरचनाओं में दरारें उभरकर सामने आ रही हैं। देखा जाए तो गुणवत्ताहीन व अमानक सीमेंट, रेत और अन्य निर्माण सामग्रियों के तय अनुपात में बड़े पैमाने पर धांधली और भ्रष्टाचार किए जाने के कारण यह पूरी नहर बेहद कमजोर और जर्जर दिखाई पड़ रहा है। हालात यह हैं कि पारदर्शिता के तमाम दावों को ठेंगा दिखाते हुए कार्यस्थल पर एक अदद सूचना पटल या जानकारी सूचक बोर्ड तक नहीं लगाया गया है, ताकि आम जनता और किसानों को प्रोजेक्ट की लागत, तय मानकों और ठेकेदार के नाम की भनक तक न लग सके।
​विभागीय भ्रष्टाचार की इस पूरी कहानी में जिम्मेदार इंजीनियरों और मैदानी अमले की भूमिका बेहद संदिग्ध और संलिप्त नजर आ रही है। आलम यह है कि न तो कोई जिम्मेदार इंजीनियर कभी मौके पर निरीक्षण करने पहुंचता है और न ही निर्माण कार्य की कोई तकनीकी निगरानी की जाती है, बल्कि कागजों में ही सब कुछ दुरुस्त दिखाकर बिना साइट विजिट के माप पुस्तिका (मेजरमेंट बुक) भरने का अवैध खेल धड़ल्ले से चल रहा है। जब इस गम्भीर मामले में तांदुला जलसंसाधन डिवीजन के कार्यपालन अभियंता आशुतोष सारस्वत से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क साधा गया, तो उन्होंने कॉल रिसीव करना भी मुनासिब नहीं समझा, जो उनकी कार्यशैली और लापरवाही पर सीधा सवालिया निशान खड़ा करता है।

​वही इस पूरे अनियमितता पर जब उपसंभाग 04 अर्थात बेरला क्षेत्र के एसडीओ रोहन शॉ से बात की गई, तो उन्होंने बरसात के मौसम का बहाना बनाकर मामले में महज लीपापोती करने की कोशिश की। एसडीओ का यह दावा कि बरसात के बाद शेष कार्य शुरू होने पर गुणवत्ताहीन हिस्से को तोड़कर फिर से बनवाया जाएगा। इस घटनाक्रम विभागीय कार्यशैली की पोल खोलने के लिए काफी है, क्योंकि सवाल यह उठता है कि जब पहली बार में ही करोड़ों का काम पूरी तरह से स्तरहीन और घटिया किया गया है, तो इस मामले में उच्च स्तरीय जांच के उपरांत जिम्मेदार अफसरों व ठेकेदार पर कार्यवाही की मांग आम जनमानस द्वारा की जा रही है।

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