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पहाड़ का सीना चीरकर बैगा परिवारों तक पहुंची विकास की राह, पीएम जनमन योजना से बदली सेजाडीह की सूरत

कवर्धा (कबीरधाम): छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले के सुदूर वनांचल में बसे ग्राम सेजाडीह के लिए नया सूरज नई उम्मीदें लेकर आया है। दशकों से सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे इस पहाड़ी गांव में प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत पहली बार पक्की सड़क का निर्माण हुआ है। यह सड़क सिर्फ डामर की पट्टी नहीं, बल्कि उन बैगा परिवारों के लिए खुशहाली का मार्ग है जो अब तक मुख्यधारा से कटे हुए थे।

चुनौतियों को मात: पहाड़ काटकर बनाया 2.1 किमी का रास्ता

​दुर्ग पीएमजीएसवाई के अधीक्षण अभियंता बलवंत सिंह पटेल के अनुसार, यह कार्य भौगोलिक दृष्टि से अत्यंत चुनौतीपूर्ण था।

  • लागत: ₹1 करोड़ 56 लाख 88 हजार की लागत से इस परियोजना को पूरा किया गया।
  • निर्माण: सेंदूरखार से सेजाडीह तक 2.1 किलोमीटर लंबी सड़क बनाने के लिए कठिन पहाड़ियों को काटा गया।
  • उद्देश्य: दुर्गम घाटियों के कारण जो गांव अब तक पहुंचविहीन थे, उन्हें पक्की सड़क से जोड़ना।

अब गांव में ही सजता है ‘बाजार’

​सड़क बनने से पहले ग्रामीणों की स्थिति अत्यंत दयनीय थी। राशन, दवाई या अन्य जरूरी सामान के लिए ग्रामीणों को पंडरिया या कुई बाजार तक पैदल जाना पड़ता था और सामान सिर या कंधे पर ढोकर लाना पड़ता था।

​”पहले गांव तक गाड़ी नहीं आ पाती थी, लेकिन अब सड़क बनने से हर बुधवार को गांव में गाड़ी आती है। अब हमें जरूरी सामान के लिए कोसों दूर भटकना नहीं पड़ता।”

ग्रामीण महिला

शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार

​सड़क के आने से अन्य सरकारी योजनाओं के द्वार भी खुल गए हैं:

  1. स्वास्थ्य: अब एम्बुलेंस गांव तक पहुंच सकेगी, जिससे मरीजों को अस्पताल ले जाना आसान होगा।
  2. शिक्षा: गांव में पक्के स्कूल का निर्माण किया गया है, जिससे बच्चों का भविष्य संवर रहा है।
  3. आवास: पीएम जनमन योजना के तहत अब गांव में पक्के मकानों (आवास) का निर्माण कार्य भी गति पकड़ रहा है।

ग्रामीणों ने जताया सरकार का आभार

​पंच बूद सिंह धुर्वे ने बताया कि सड़क न होने से पूरा गांव परेशान था, लेकिन अब आवागमन सुगम होने से जीवन आसान हो गया है। ग्रामीणों ने इस ऐतिहासिक बदलाव के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की है।

निष्कर्ष: सेजाडीह की यह तस्वीर इस बात का प्रमाण है कि यदि इच्छाशक्ति हो, तो दुर्गम पहाड़ों को काटकर भी विकास की गंगा पहुंचाई जा सकती है। ‘पीएम जनमन योजना’ ने वास्तव में विशेष पिछड़ी जनजातियों (PVTGs) के जीवन में ‘जन-मन’ की खुशहाली भर दी है।

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