
■बेमेतरा:- विगत एक सप्ताह से बारिश की बेरुखी और चिलचिलाती उमस के कारण असमंजस और घोर निराशा के गर्त में डूब रहे बेमेतरा जिले के अन्नदाताओं के लिए आखिरकार कुदरत ने राहत का पिटारा खोल दिया है। बीते शनिवार की शाम जैसे ही श्रद्धा और उल्लास के साथ भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा का शुभारंभ हुआ, वैसे ही आसमान पर काले बादलों का डेरा जम गया और जिले में मानसून का धमाकेदार पुनरागमन हुआ। बीते 36 घंटों से जिले के चारों विकासखंडों—साजा, बेरला, बेमेतरा व नवागढ़ सहित सभी 9 तहसीलों में रुक-रुक कर हो रही झमाझम और मूसलाधार बारिश ने सूखे की कगार पर खड़े धान के खेतों की पूरी तस्वीर ही बदलकर रख दी है। खेतों में पानी की कमी से जो धान के कोमल पौधे पीले पड़ने लगे थे, उन्हें इस बारिश ने संजीवनी बूटी की तरह नया जीवनदान दिया है।
फिलहाल जिले के विभिन्न इलाकों से आ रही जमीनी रिपोर्टों के अनुसार, बारिश का यह असर किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि समूचा बेमेतरा जिला इस समय पानी-पानी हो चुका है। दाढ़ी, देवकर, भिम्भौरी, नांदघाट, थान खम्हरिया, बेरला, नवागढ़, साजा और जिला मुख्यालय बेमेतरा के ग्रामीण अंचलों में रिकॉर्ड तोड़ वर्षा दर्ज की गई है।वही खेतों में इस समय जबरदस्त जलभराव की स्थिति है, जो धान की रोपाई और बियासी के कार्यों के लिए सबसे मुफीद मानी जाती है। जो किसान परिवार कुछ दिनों पहले तक अपनी फसलों को बचाने के लिए इंद्रदेव से मनुहार कर रहे थे और मंदिरों में पूजा-अर्चना कर रहे थे, वे अब झमाझम बरसते पानी के बीच ख़ुशी-ख़ुशी अपने खेतों की ओर रुख कर चुके हैं। ग्रामीण इलाकों में ट्रैक्टरों की आवाज और किसानों के चेहरों की मुस्कान इस बात की तस्दीक कर रही है कि यह बारिश कितनी जरूरी थी।
चूंकि कृषि विशेषज्ञों और मौसम विभाग की मानें तो खरीफ के इस शुरुआती दौर में धान की फसलों के लिए पानी की निरंतर आपूर्ति बेहद संवेदनशील और आवश्यक होती है। राहत की बात यह है कि मौसम विभाग ने आगामी एक सप्ताह से भी अधिक समय तक जिले में इसी तरह के जोरदार बारिश के आसार जताए हैं। इसका साफ मतलब है कि आने वाले दिनों में भी खेतों में पानी की कोई कमी नहीं होने वाली है। खेतों में पर्याप्त पानी जमा होने से अब खाद के छिड़काव और आगे की कृषि गतिविधियों ने भी रफ्तार पकड़ ली है। रथयात्रा के शुभ अवसर पर शुरू हुई इस रहमत की बारिश को ग्रामीण जन भगवान का विशेष आशीर्वाद मान रहे हैं, जिसने न सिर्फ जमीन की प्यास बुझाई है बल्कि बेमेतरा के ग्रामीण अर्थव्यवस्था की उम्मीदों को भी नए पंख दे दिए हैं।
