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अफसरों की दोहरी जिम्मेदारी के बोझ तले दबा वन विभाग,प्रदेश का इकलौता पक्षी अभयारण्य अफसर विहीन होने की दिशा में, प्रशासन बेपरवाह

बेमेतरा:- ​दुर्ग वनमंडल के अंतर्गत आने वाला बेमेतरा जिला इन दिनों गंभीर प्रशासनिक संकट से जूझ रहा है। जिसमे बेमेतरा उप वनमण्डल के पूर्व एसडीओ वी.एन. दुबे की सेवानिवृत्ति और रेंजर माधुरी तिवारी के मातृत्व अवकाश पर जाने के बाद से दोनों ही महत्वपूर्ण पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। वर्तमान में दुर्ग उप वनमंडल के एसडीओ जितेंद्र कुमार साहू को बेमेतरा एसडीओ का और दुर्ग उड़नदस्ता(फ्लाइंग) प्रभारी राम पटेल को बेमेतरा रेंजर का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। विडंबना यह है कि दुर्ग और बेमेतरा के बीच करीब 75 किलोमीटर तथा इनकी अंतिम सीमाओं के बीच लगभग 150 किलोमीटर की दूरी है, जिसके कारण इन अधिकारियों को दोहरी जिम्मेदारी निभाने में भारी मानसिक व शारीरिक मशक्कत करनी पड़ रही है। संकट यहीं खत्म नहीं होता है बल्कि अगले तीन महीनों के भीतर जिले के दूसरे वन परिक्षेत्र साजा के रेंजर पीआर. लसेल भी सेवानिवृत्त होने वाले हैं, जिसके बाद यह पूरा क्षेत्र तकनीकी रूप से पूरी तरह अफसर विहीन हो जाएगा।

उल्लेखनीय है कि पूरे प्रदेश में भौगोलिक दृष्टि से प्रदेश में सबसे कम वन क्षेत्र वाले दुर्ग और बेमेतरा जिलों के लिए यह घोर लापरवाही बेहद संवेदनशील है। गौरतलब है कि बेमेतरा जिले में ही प्रदेश का इकलौता पक्षी अभयारण्य (गिधवा-परसदा) स्थित है, जिसकी देखरेख और संरक्षण का जिम्मा सीधे वन विभाग के कंधों पर है। ऐसे में बिना स्थाई मैदानी नेतृत्व के इस अनूठे अभयारण्य और विभागीय कामकाज का बेपटरी होना तय है। इस गंभीर प्रशासनिक शून्यता पर जब दुर्ग वनवृत्त की मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) एम. मर्सी बेला से चर्चा की गई, तो उन्होंने गेंद शासन के पाले में डालते हुए कहा कि रिक्त पदों पर नई नियुक्ति व तबादलों की प्रक्रिया शासन स्तर पर लंबित है, वहीं दूसरी ओर डीएफओ दीपेश कपिल ने इस विषय पर अपना पक्ष रखने के लिए फोन लगाया तो उन्होंने भी जल्द ही रेंजर उपलब्ध हो जाने की बात कही।

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