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दुर्ग पुलिस का बड़ा एक्शन: साइबर ठगों को ‘म्यूल अकाउंट’ बेचने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश, मास्टरमाइंड समेत 3 गिरफ्तार

करोड़ों के ट्रांजेक्शन का खुलासा; साधारण खाता 20 हजार और करंट अकाउंट 50 हजार रुपये में बेचता था गिरोह

भिलाई/दुर्ग।

दुर्ग पुलिस ने संगठित साइबर और आर्थिक अपराध के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने बैंक खातों का अवैध कारोबार करने वाले एक बेहद शातिर अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। यह गिरोह साइबर ठगों और आर्थिक अपराधियों को मोटी रकम में ‘म्यूल अकाउंट’ (फर्जी या दूसरों के नाम पर खुले बैंक खाते) उपलब्ध कराता था। पुलिस ने इस धंधे के मास्टरमाइंड मनोज कुमार भुतड़ा को उसके दो सहयोगियों के साथ गिरफ्तार किया है।

​आरोपियों के कब्जे से भारी मात्रा में बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड और अन्य दस्तावेज बरामद किए गए हैं। गिरोह द्वारा इंडसंड बैंक, आईडीएफसी बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक जैसे कई प्रतिष्ठित बैंकों में खोले गए खातों के जरिए अब तक करोड़ों रुपये के अवैध ट्रांजेक्शन की बात सामने आई है।

घेराबंदी कर सुपेला ओवरब्रिज के पास दबोचे गए आरोपी

​24 मई 2026 को पुलिस को पुख्ता सूचना मिली थी कि जगदलपुर का रहने वाला मास्टरमाइंड मनोज कुमार भुतड़ा अपने साथियों के साथ भारी मात्रा में म्यूल अकाउंट के दस्तावेज (स्टाफ) लेकर उन्हें खपाने के लिए भिलाई आया हुआ है। सूचना मिलते ही सुपेला पुलिस और एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट (ACCU) की टीम ने जाल बिछाया। पुलिस टीमों ने पांच रास्ता हनुमान मंदिर, सुपेला ओवरब्रिज के पास घेराबंदी की और तीनों आरोपियों को धर दबोचा।

पकड़े गए आरोपियों के नाम:

  1. मनोज कुमार भुतड़ा (उम्र 33 वर्ष), पिता: भंवर लाल, निवासी: ग्राम बिरेतरा, चौकी हल्दी, जिला बालोद (मास्टरमाइंड)।
  2. केवल सेठिया (उम्र 26 वर्ष), पिता: तुलाराम सेठिया, निवासी: ग्राम केसलुर, जिला बस्तर।
  3. सत्यनारायण सेठिया (उम्र 26 वर्ष), पिता: श्रीनाथ सेठिया, निवासी: मांझीगुड़ा, थाना दरभा, जिला बस्तर।

जब्त किए गए दस्तावेज (मशरूका):

  • 11 बैंक पासबुक
  • 07 एटीएम (ATM) कार्ड
  • 03 फिनो पेमेंट किट/कार्ड
  • 03 आधार कार्ड [सुरक्षा कारणों से नंबर गोपनीय]
  • 01 पैन (PAN) कार्ड

पूछताछ में हुआ चौंकाने वाला खुलासा, ऐसे काम करता था गिरोह

​पुलिस की कड़ी पूछताछ में मास्टरमाइंड मनोज कुमार भुतड़ा ने स्वीकार किया कि वह वर्ष 2022 से अवैध रूप से बैंक खातों की व्यवस्था कर उन्हें साइबर अपराधियों को बेचने का काम कर रहा था।

  • खातों की कीमत: गिरोह एक साधारण बैंक खाते को 15 से 20 हजार रुपये में और करंट अकाउंट (Current Account) को 40 से 50 हजार रुपये में आर्थिक अपराधियों को बेचता था।
  • 200 से अधिक खाते खुलवाए: आरोपी ने अब तक बालोद, गुंडरदेही, दुर्ग, जगदलपुर समेत अन्य क्षेत्रों में संगठित तरीके से खुद के नाम (रूद्र किराना) और अपने सहयोगियों के नाम पर 200 से अधिक म्यूल अकाउंट खुलवाए थे।
  • मिनिमम बैलेंस का खेल: आरोपी खाता खुलवाने के लिए जरूरी न्यूनतम राशि (मिनिमम बैलेंस) खुद देता था और खाता चालू होते ही वह राशि वापस निकाल लेता था।
  • साइबर अपराधियों से भी ठगी: मास्टरमाइंड इतना शातिर था कि जिन खातों को वह अपराधियों को बेचता था, उनमें बड़ा ट्रांजेक्शन होने पर वह बैंकों में अपनी सेटिंग का इस्तेमाल कर खातों को होल्ड करवा देता था। बाद में खुद बैंक से संपर्क कर होल्ड हटवाता और पूरी रकम खुद निकालकर चंपत हो जाता था।

कई राज्यों की पुलिस को थी तलाश, मामला दर्ज

​आरोपी मनोज कुमार भुतड़ा काफी समय से फरार चल रहा था। छत्तीसगढ़ के रायपुर और जगदलपुर के अलावा गुजरात के सूरत और उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद की पुलिस को भी इस म्यूल अकाउंट घोटाले में उसकी सरगर्मी से तलाश थी। वर्तमान में वह बालोद जिले के गुंडरदेही अंतर्गत ग्राम तर्राभाठा में छिपकर रह रहा था।

​सुपेला पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ अपराध क्रमांक 718/2026, धारा 317(2), 318(4) बीएनएस (BNS) के तहत मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस का कहना है कि इस गिरोह के तार अन्य राज्यों से भी जुड़े हैं। पकड़े गए आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर गिरोह के अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की अलग-अलग टीमें रवाना की गई हैं, जिससे जल्द ही कुछ और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।

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