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नक्सली कमांडर माडवी हिडमा और पत्नी राजे का एक ही चिता पर अंतिम संस्कार, गृहग्राम पूवर्ती में पसरा मातम!

सुकमा, छत्तीसगढ़। आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू जिले में सुरक्षा बलों के साथ हुई मुठभेड़ में मारे गए टॉप नक्सली लीडर माडवी हिडमा और उसकी पत्नी राजे का अंतिम संस्कार आज (20 नवंबर, 2025) उनके गृहग्राम पूवर्ती में एक ही चिता पर किया गया। एनकाउंटर के दो दिन बाद जैसे ही दोनों का शव गांव पहुंचा, पूरे इलाके में मातम छा गया।

​💔 नम आँखों से दी गई अंतिम विदाई

​हिडमा और उसकी पत्नी के अंतिम संस्कार में सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण और परिचित शामिल हुए। दोनों के शव को गांव के मुख्य मार्ग से होकर श्मशान घाट तक ले जाया गया। एक विशेष और भावुक क्षण तब आया जब दंपति को एक ही चिता पर अग्नि दी गई। इस दौरान मौजूद सभी लोगों की आँखें नम हो गईं।

​हिडमा की मौत के बाद से ही उसके गांव पूवर्ती में शोक का माहौल था। हिडमा की माँ ने पुलिस से भावुक अपील करते हुए कहा था कि वह बूढ़ी हो चुकी हैं और बेटे का शव नहीं ला सकतीं, इसलिए पुलिस ही उनका शव गांव पहुंचा दे ताकि वह अंतिम संस्कार कर सकें। आज सुबह हिडमा के परिजन उनका और उनकी पत्नी का शव लेकर पूवर्ती गांव पहुंचे और विधि-विधान से अंतिम संस्कार संपन्न किया गया।

​👤 कौन था माडवी हिडमा?

​माडवी हिडमा का नाम देश के खतरनाक नक्सली चेहरों में शुमार था, और उसकी प्रोफाइल नक्सल संगठन में बेहद अहम थी:

  • शुरुआत: हिडमा का जन्म दक्षिण सुकमा के पूवर्ती गांव में एक आदिवासी परिवार में हुआ था। वह महज 16 साल की उम्र में ही नक्सल संगठन से जुड़ गया था।
  • शिक्षा और ट्रेनिंग: नक्सली संगठन के एजुकेशन सिस्टम और कल्चरल कमेटी से उसने पढ़ना-लिखना और गाना-बजाना तक सीखा। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद उसकी पहली पोस्टिंग महाराष्ट्र के गढ़चिरौली इलाके में हुई थी।
  • संगठन में पद:
    • ​वह सेंट्रल कमेटी का सबसे युवा सदस्य था।
    • ​वह पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PGLA) की बटालियन-1 का चीफ था।
    • ​वह माओवादी स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZ) का भी सदस्य था।
    • ​वह सीपीआई (माओवादी) की 21 सदस्यीय सेंट्रल कमेटी में भी शामिल था।

​🚨 कई बड़े नक्सली हमलों का मास्टरमाइंड

​हिडमा को कई बड़ी और खतरनाक नक्सली घटनाओं का नेतृत्व करने के लिए जाना जाता था। उसकी भागीदारी वाले प्रमुख हमले:

  • झीरम घाटी हमला
  • बीजापुर हमला
  • बुर्कापाल हमला
  • दंतेवाड़ा हमला: हिडमा के नेतृत्व में हुए इस हमले में 76 जवान शहीद हुए थे। इस हमले के बाद संगठन में उसकी हैसियत और बढ़ गई थी।
  • शीर्ष कमांडर: 2019 में नक्सली रमन्ना की मौत के बाद हिडमा को नक्सलियों का शीर्ष कमांडर बना दिया गया था।

​💥 18 नवंबर को हुआ था एनकाउंटर

​बता दें कि 18 नवंबर को आंध्रप्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू जिले में हुई मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने हिडमा और उसकी पत्नी राजे समेत कुल 6 नक्सलियों को मार गिराया था।

माडवी हिडमा ने 16 साल की उम्र में नक्सल संगठन ज्वाइन किया था, और वह सीपीआई (माओवादी) की 21 सदस्यीय सेंट्रल कमेटी का हिस्सा था।

माडवी हिडमा कई भीषण और बड़े नक्सली हमलों का मास्टरमाइंड था, जिसने सुरक्षा बलों को भारी नुकसान पहुंचाया था। इनमें से तीन सबसे प्रमुख हमले, जिनके नेतृत्व का श्रेय हिडमा को दिया जाता है, निम्नलिखित हैं:

​1. 🩸 दंतेवाड़ा हमला (अप्रैल 2010)

​यह हिडमा के नेतृत्व में हुए सबसे घातक हमलों में से एक था, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया था।

  • क्या हुआ: छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में माओवादियों के हमले में 76 सुरक्षाकर्मी (75 CRPF जवान और 1 पुलिसकर्मी) शहीद हो गए थे।
  • रणनीति: नक्सलियों ने सीआरपीएफ की रोड ओपनिंग पार्टी को घात लगाकर निशाना बनाया था। इस हमले के बाद संगठन में हिडमा की हैसियत तेज़ी से बढ़ गई थी।

​2. 🪖 झीरम घाटी हमला (मई 2013)

​यह हमला छत्तीसगढ़ के राजनीतिक इतिहास की एक बड़ी त्रासदी था।

  • क्या हुआ: छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले की झीरम घाटी में कांग्रेस पार्टी के काफिले पर घात लगाकर हमला किया गया था।
  • परिणाम: इस हमले में छत्तीसगढ़ कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, और वरिष्ठ नेता महेंद्र कर्मा सहित 27 से अधिक लोग मारे गए थे।

​3. 💥 बुर्कापाल हमला (अप्रैल 2017)

​यह हमला भी सुरक्षा बलों पर हुए भीषण हमलों में से एक था।

  • क्या हुआ: छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में स्थित बुर्कापाल में नक्सलियों ने CRPF की 74वीं बटालियन के जवानों पर हमला किया था।
  • परिणाम: इस हमले में 25 CRPF जवान शहीद हो गए थे।

​हिडमा इन सभी हमलों की योजना बनाने और उन्हें अंजाम देने वाली पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PGLA) की बटालियन-1 का चीफ था। उसकी मौत को सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।

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