राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में स्वास्थ्य विभाग का एक नया आदेश विवादों के घेरे में आ गया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) द्वारा जारी इस निर्देश ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के कर्मचारियों के बीच भारी असंतोष पैदा कर दिया है।
विवाद की मुख्य वजह
हाल ही में जारी आदेश में कहा गया है कि केवल NHM कर्मचारियों के लिए आधार आधारित (Biometric) उपस्थिति अनिवार्य होगी और इसी उपस्थिति के आधार पर उनके वेतन का आहरण (Disbursement) किया जाएगा। कर्मचारियों का तर्क है कि जब नियम पूरे विभाग के लिए हैं, तो इसे केवल संविदा कर्मियों पर ही क्यों थोपा जा रहा है?
‘एक विभाग, दो नियम’ पर नाराजगी
NHM कर्मचारियों ने विभाग पर दोहरी नीति अपनाने का आरोप लगाया है। उनके विरोध के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- समानता का अभाव: स्वास्थ्य सचिव के पूर्व निर्देशों के अनुसार, आधार आधारित उपस्थिति विभाग के सभी नियमित और संविदा कर्मचारियों के लिए लागू होनी थी।
- चयनित सख्ती: कर्मचारियों का कहना है कि बायोमेट्रिक सिस्टम से उन्हें परहेज नहीं है, लेकिन इसे केवल संविदा कर्मचारियों (NHM) पर लागू करना भेदभावपूर्ण है।
- वेतन पर संकट: उपस्थिति को सीधे वेतन से जोड़ने के सख्त निर्देश ने कर्मचारियों की चिंता बढ़ा दी है।
कर्मचारी संगठनों ने दी आंदोलन की चेतावनी
इस आदेश के बाद सोशल मीडिया से लेकर धरातल तक विरोध तेज हो गया है। NHM कर्मचारी संघ के प्रदेश प्रवक्ता पूरन दास ने स्पष्ट किया कि विभागीय नियम सभी पर समान रूप से लागू होने चाहिए। उन्होंने इसे कर्मचारियों को निशाना बनाने की कोशिश करार दिया है।
“यदि विभाग बायोमेट्रिक सिस्टम लागू करना चाहता है, तो यह नियमित और संविदा सभी श्रेणियों के लिए होना चाहिए। केवल संविदा कर्मियों के लिए अलग नियम बनाना न्यायसंगत नहीं है।” — पूरन दास, प्रदेश प्रवक्ता, NHM कर्मचारी संघ
आगे की राह: लामबंदी शुरू
सूत्रों के अनुसार, जिले के स्वास्थ्य कर्मचारी इस आदेश के खिलाफ एकजुट हो रहे हैं। आने वाले दिनों में CMHO को ज्ञापन सौंपने और मांग पूरी न होने पर आंदोलन शुरू करने की तैयारी की जा रही है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस बढ़ते असंतोष को देखते हुए आदेश में संशोधन करता है या अपनी सख्ती बरकरार रखता है।
